बिजली कंपनी पर लगा 9 हजार का जुर्माना:उपभोक्ता को थमाया था सवा चार लाख का बिल, उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने सुनाया फैसला

भिण्ड में जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने बिजली कंपनी के विरुद्ध शिकायत पर सुनवाई करते हुए आवेदक को बढ़ी राहत दी। उपभोक्ता द्वारा चार साल पहले समस्त बिल का भुगतान किए जाने के बाद कनेक्शन पीडीसी किए जाने का आवेदन दिया था। बिजली अफसराें ने बिल को कागजों में जारी रखा। सुनवाई होने तक के माह का सवा चार लाख बिल थमाया। बिजली अफसरों की लापरवाही पर उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने कड़ी फटकार लगाते हुए बिजली कंपनी पर नौ हजार का जुर्माना लगाया।

दरअसल मामला यह हैकि उत्तर प्रदेश के जालौन जिला निवासी सुशील कुमार ने भिंड में व्यापार करने के लिए वर्ष 2019 में एक कनेक्शन लिया। इसके बाद कोरोना काल में व्यापार ठप रहा। व्यापारी ने अपना कारोबार समेट लिया और बिजली बिल की सवा लाख राशि का भुगतान करते हुए कनेक्शन पीडीसी किए जाने के लिए आवेदन दिया। इसके बाद बिजली अफसरों ने कनेक्शन पीडीसी करने का आश्वासन दे दिया। इसके बाद कनेक्शन कागजों में चालू रहा। व्यापारी अपना कारोबार समेट कर जालौन में रहने लगा। इधर लगातार कनेक्शन का बिल जारी रहा।

इस बात के लिए अगस्त 2022 में उपभोक्ता सुशील कुमार के नाम से नोटिस जारी होने लगे। इस पर बिजली उपभोक्ता को सवा दो लाख रुपए बिल जमा करने के लिए थमाया गया। इस पर जब उपभोक्ता को इस बात की जानकारी लगी तो उसने पूरे मामले की सुनवाई के लिए उपभोक्ता संरक्षण आयोग की शरण ली। एडवाेकेट मुकेश जैन ने बताया कि जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई और उपभोक्ता का पक्ष रखा गया।

सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष अवनीश कुमार वर्मा, सदस्य डॉ. मीना शर्मा और दिनेश कुलश्रेष्ठ के समक्ष साक्ष्य और तर्कों रखे गए। इस पर उपभोक्ता संरक्षण आयोग संतुष्ट हुए। सितम्बर 2020 के बाद से लगातार बिजली अफसर बिल थमाते रहे और वर्तमान में करीब सवा चार लाख रुपए की राशि हो गई। आयोग के सदस्यों ने बिल की समस्त राा को निरस्त किए जाने का ऑर्डर दिया। साथ ही परिवादी का बिजली कनेक्शन 5 सितंबर 2020 से पी डी सी दर्ज कर विच्छेदित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा न्यायालय ने परिवादी को हुई परेशानी के चलते 9 हजार रुपए हर्जाना के रूप मे एक माह के अंदर बिजली कंपनी परिवादी सुशील कुमार को दिए जाने का आदेश दिया।

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