बेवी एंड नौष और बार फलाई बार आबकारी की मेहरबानी से चल रहे बिना लायसेंस के शुष्क दिवस पर बार खोलकर परोसी जा रही थी शराब,

विभाग ने मालिक की बजाये मैनेजर पर कार्यवाही कर बचा ली अपनी नाक
जबलपुर।

ऐसा यहीं हो सकता है……. बियर बार खोलना आसान नहीं होता है, इसके लिए इतने नियम-कायदे होते है कि सामान्य व्यक्ति के बस में नहीं रहता है वह बियर-बार चला सके लेकिन यदि किसी भी तरह आबकारी विभाग से सेटिंग हो जाये तो बिना लायसेंस के भी बियर बार धड़ल्ले से चलाया जा सकता है। जिले में गोरा बाजार थाना क्षेत्र के तिलहरी में बार फलाई और क्र ाइस्चर्च स्कूल के समीप बेवी एंड नौष बार खुलेआम बिना लायसेंस के चलाये जा रहे है जिसकी पूरी जानकारी आबकारी विभाग के जिम्मेवारों को भी है लेकिन अपने फायदे के कारण नियम विरूध्द तरीके से चलाये जा रहे इन दोनों बारों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है।

बताया जाता है बार फलाई बार के मालिक रोशन कुकरेजा और रोहित पुरूसवानी एवं बेवी एंड नौष के मालिक सार्थक सेठी एवं पीयूष खत्री बताये जाते है। इन बार संचालकों की आबकारी विभाग में इतनी तगड़ी सेटिंग है कि लायसेंस नहीं होने के बावजूद वे बार चलाकर लाखों की कमाई कर रहे है। सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आबकारी विभाग वालों को भी बकायदे खुर्चन मिलती होगी तभी तो आबकारी विभाग इन पर कार्यवाही नहीं करता। शुष्क दिवस पर खुला था बार फलाई बार के मालिक आबकारी विभाग के साथ जिला प्रशासन तक की नहीं सुनता, यदि ऐसा नहीं है तो लोकसभा चुनाव में मतदान को देखते हुये कलेक्टर द्वारा चुनाव प्रचार की समाप्ति की शाम से मतदान की समाप्ति तक जिले में शुष्क दिवस घोषित करने के बाद भी फलाई बार बकायदे खुला रहा और उसमें आम दिनों की तरह ग्राहकों को बैठालकर शराब भी परोसी जा रही थी।

यह जानकारी अब सहायक आबकारी आयुक्त रविन्द्र मानिकपुरी को लगी तो अपनी नौकरी बचाने के चक्करमें आनन फानन में उन्होंने बार में छापा मारते हुये शराब जप्त की लेकिन नियमानुसार बार मालिकों को आरोपी बनाने की बजाये मानिकपुरी ने मैनेजर प्रशान्त सिंह पर मामला बनाकर खानापूर्ति कर दी। इतना ही नहीं इस कार्यवाही को भी सहायक आबकारी आयुक्त गुप्त रखे रहे और किसी को कानों कान खबर नहीं होने दी। सवाल यह उठता है कि यदि साहयक आबकारी आयुक्त को जानकारी नहीं थी कि फलाई बार के पास लायसेंस नहीं है और शुष्क दिवस पर बार खोलकर शराब परोसे जाने पर जब शराब जप्ती की कार्यवाही की गई तो क्या आबकारी विभाग के अधिकारियों ने यह नहीं देखा कि बार का लायसेंस नहीं है।

शराब ठेकेदारों पर इतनी मेहरबानी क्यों बताया जाता है जिले में शराब ठेकेदार तय मूल्य से अधिक दाम पर शराब बेच रहे है लेकिन लगातार शिकायतों के बाद भी आबकारी विभाग कार्यवाही नहीं करता। ऊपर से नियम होने के बाद भी शराब दुकानों में न तो रेट लिस्ट लगाई गई ना ही उपभोक्ता को शराब का बिल दिया जा रहा है और यह सब अनदेखी शराब ठेकेदारों को मनमानी करने के लिए दी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *