‘बच्चों के नाम लालू यादव या राहुल गांधी रखने से नहीं रोक सकते’, क्यों सुप्रीम कोर्ट ने की ऐसी टिप्पणी?

सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया। साथ में टिप्पणी भी कि कोई माता-पिता अपने बच्चों के नाम लालू प्रसाद यादव और राहुल गांधी रख दें तो उन्हें कौन रोक सकता है? दरअसल, कोर्ट में नेताओं से मिलते-जुलते नाम वाले डमी उम्मीदवारों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया था कि हम नाम वाले उम्मीदवारों को चुनाव से दूर रखने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए।

साबू ने क्या रखी थी मांग?
यह याचिका साबू स्टीफन नाम के एक शख्स ने दायर की थी। उन्होंने वकील वीके बीजू के माध्यम से कहा कि मिलते-जुलते नामों वाले उम्मीदवारों को जानबूझकर चुनाव को प्रभावित करने के लिए उतारा जाता है, ताकि वोटरों को भ्रमित किया जा सके। कई बार ऐसा होता है कि मशहूर नेता इस तरह के हमनामों की वजह से बहुत कम अंतर से चुनाव हारे हैं। अदालत चुनाव आयोग को निर्देश दे कि इस तरह के मामलों में गहन जांच पड़ताल की जाए ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके।

केरल के तीन उदाहरण भी दिए
वकील वीके बीजू ने केरल से तीन उदाहरणों का हवाला दिया। सतीशन पचेनी 1,820 वोटों से हार गए, जबकि 2009 में उनके नाम वाले उम्मीदवार को 5,478 वोट मिले थे। उस साल, पी ए मोहम्मद रियास कोझिकोड से 833 वोटों से हार गए थे, जबकि ‘रियास’ नाम के चार उम्मीदवारों ने कुल मिलाकर 6,371 वोट हासिल किए थे। 2016 में, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन मंजेश्वरम से 89 वोटों से हार गए, जहां उनके नाम को 467 वोट मिले।

याचिकाकर्ता ने कहा कि मौजूदा आम चुनाव में तमिलनाडु के पूर्व सीएम ओ पन्नीरसेल्वम का सामना चार अन्य ओ पन्नीरसेल्वम से है। याचिकाकर्ता यह दावा नहीं कर रहा है कि सभी स्वतंत्र उम्मीदवार फर्जी हैं या उन्हें चुनाव लड़ने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन चुनाव आयोग के पास एक वास्तविक उम्मीदवार से फर्जी तरीके से वोट छीनने के लिए स्थापित किए गए डमी उम्मीदवारों को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र होना चाहिए।

जस्टिस ने कहा- क्या उसे चुनाव लड़ने से रोक देंगे
जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम बचपन से राहुल गांधी या लालू यादव है तो आप क्या उसे चुनाव लड़ने से रोक देंगे। क्या माता पिता को अपने बच्चों के ऐसे नाम रखने से रोका जा सकता है। ऐसा कहते हुए पीठ ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया।

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