बचकाने डायलॉग-फीके किरदार, कंगना रनौत की ‘तेजस’ में नहीं कोई दम

कंगना रनौत बॉलीवुड के सबसे विवादित स्टार्स में से एक रही हैं. उन्हें अपनी बेबाकी के लिए जाना जाता है. देश और दुनिया में कुछ भी हो रहा हो, उसपर एक्ट्रेस अपनी राय रखने में कभी पीछे नहीं रहतीं. बहुत से लोगों को उनकी ये बात और उनकी कही बातें बिल्कुल पसंद नहीं है, लेकिन कम से कम वो ये कह सकते थे कि कंगना रनौत एक अच्छी एक्ट्रेस हैं. लेकिन अगर उन लोगों कंगना की नई फिल्म ‘तेजस’ देख ली, तो वो ये भी नहीं कह पाएंगे.

क्या है फिल्म की कहानी?

तेजस की कहानी की बात कर लेते हैं. ये फिल्म तेजस गिल नाम की एक लड़की के बारे में है, जो इंडियन एयर फोर्स में पायलट है. तेजस जाबाज है, समझदार है और अड़ियल भी. वो अपने देश के जवान को बचाने के लिए बिना डरे अपने सीनियर के ऑर्डर को इग्नोर कर देती है. चेहरों के पीछे छुपे राज भी पढ़ लेती है और मुश्किलों को सुलझाना तो उसके बाएं हाथ का खेल है. लेकिन तेजस बाहर से जितनी बहादुर है, अंदर से उतनी ही टूटी हुई भी है. इसकी वजह भी बहुत बड़ी है.

भारत पर हमेशा ही आंतकियों का खतरा रहता है. ऐसे में एक दिन इंजीनियर के रूप में पाकिस्तान गया भारत का स्पाई पकड़ा जाता है. इसको बचाने के लिए भारतीय एजेंसी काम कर रही है. इस बीच तेजस उसे बचाने का जिम्मा अपने सिर लेती है. स्पाई के पास भारत के अयोध्या में बने राम मंदिर में होने वाली बड़ी अनहोनी की खबर है और जान देश के लिए कीमती है. लेकिन उसे बचा पाना आसान बात नहीं है. पर तेजस ने अगर इरादा कर लिया तो उसे कोई नहीं रोक सकता. ऐसे में वो इस सुसाइड मिशन पर जाएगी और कुछ कर दिखाएगी.

कैसी है फिल्म?

फिल्म की कहानी सुनने में भले ही अच्छी या ठीक लग रही हो, लेकिन इसे पर्दे पर ढंग से उतारने में मेकर्स नाकाम रहे हैं. इस मूवी में एक्टिंग से लेकर एडिटिंग, VFX, डायलॉग, कंसिस्टेंसी हर चीज की दिक्कत है. फिल्म के फर्स्ट हाफ को देखकर लग रहा है कि कंगना रनौत एक्टिंग करना ही भूल गई हैं. कहीं-कहीं तो उनकी हरकतें इतनी बचकानी लगती हैं कि आप अपना माथा पकड़ लेते हैं.

तेजस गिल के रोल में कंगना रनौत ने मेहनत की है ये दिखता है, पर सिर्फ कॉम्बैट ट्रेनिंग में. फिल्म बहुत आगे-पीछे दौड़ती है. तेजस को छोड़कर इसके सारे किरदार उथले हैं. एक तेजस को हीरो दिखाने के चक्कर में किसी और चीज पर मानों काम किया ही ना गया हो. फिल्म का हर डायलॉग आपको क्रिंज फील करवाता है. एक सीन में तेजस अपने साथी प्रशांत के पास जाकर पूछती है कि वो क्या बड़बड़ा रहा है. वो कहता है कि उसने एक कविता लिखी है. वो कविता क्या है? ‘हम उड़ते उड़ते जाएंगे, देश के काम आएंगे’.

मूवी के सीन्स देखते हुए लगता है कि डायरेक्टर सर्वेश मेवाड़ा इसए बनाते बनाते खुद ही भूल जा रहे थे कि एक किरदार कब क्या कर रहा है. एक सीन में एक बात हो रही है और दूसरे सीन में वो बात बदल जा रही है. पहले किरदार डिनर पर जाने की बात करे रहे हैं फिर अगले सीन में उसी को लेकर कह रहे हैं लंच नहीं हुआ चलो डिनर करते हैं. फिल्म में एक भी किरदार से जुड़ने का मौका आपको नहीं मिलता. यहां तक कि तेजस से भी नहीं. बड़े और भारी सब्जेक्ट पर फिल्म बनाने के बावजूद उसके किरदारों में इतनी गहराई नहीं भरी गई है और ना ही उन्हें स्क्रीन पर इस तरह से जिंदा किया गया है कि आप उसने जुड़ें.

‘तेजस’ के एक सीन में कंगना रनौत

फिल्म में बहुत सी बचकानी चीजें हैं. एक कंप्युटराइज्ड फिल्म के पीछे इंडियन एयर फोर्स के पूरे विमान छुपा दिए जा रहे हैं. वो विमान दूसरे देश के अंदर खड़े हैं और उनका रडार उन्हें नहीं पकड़ पा रहा. देश में आंतकी घुस आए हैं और हमला करने वाले हैं, लेकिन 2 मिनट में उन्हें खत्म कर लिया जा रहा है. बड़ी-बड़ी मुश्किलें चुटकियों में बिना खास बिल्ड-अप के सुलझ जा रही हैं. ये ऐसे सीक्वेंस हैं जिन्हें देखते हुए आपके दिल की धड़कनें तेज होनी चाहिए, लेकिन अफसोस ऐसा कुछ भी नहीं होता.

मूवी के VFX की बात तो ना ही की जाए तो अच्छा है, क्योंकि ये बेहद खराब हैं. VFX देखकर आपको किसी सस्ती कार्टून मूवी की याद आ जाएंगी. ये कंगना रनौत की सबसे कमजोर और खराब फिल्मों में से एक है. कंगना ने इससे बहुत बेहतर काम करके हमें पहले दिखाया है. यहां उन्हें देखकर विश्वास ही नहीं होता कि ये वही कंगना हैं, जिन्होंने क्वीन जैसी फिल्म दी है. उनके साथ इसमें अंशुल चौहान हैं. उनका काम काफी अच्छा है. आशीष विद्यार्थी, वरुण मित्रा, मुश्ताक काक जैसे एक्टर्स भी इस फिल्म का हिस्सा हैं. फिल्म का फर्स्ट हाफ बिल्कुल झेलने लायक नहीं है, सेकंड हाफ उसके मुकाबले ठीक है. कुल-मिलाकर तेजस काफी निराश करने वाली फिल्म है.

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