पटवारी भर्ती कैंसिल करने की मांग, भोपाल में प्रदर्शन:क्लीन चिट पर इसी महीने हुए भर्ती के आदेश; अभ्यर्थी बोले- दिल्ली तक जाएंगे

पटवारी भर्ती रद्द करने के लिए अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया है। भोपाल में प्रदर्शन के लिए प्रदेश भर से जुटे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर कराना चाहते हैं। उनका यह भी कहना वे अब दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जुटेंगे।

पटवारी भर्ती परीक्षा का रिजल्ट 30 जून 2023 में आया था। धांधली के आरोप पर तब शिवराज सरकार ने जांच होने तक नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। 19 जुलाई 2023 में जांच के लिए आयोग गठित हुआ। 8 महीने जांच चली। रिटायर्ड जस्टिस राजेंद्र वर्मा ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी।

भर्ती परीक्षा को क्लीन चिट मिलने के बाद 15 फरवरी को सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति के आदेश जारी किए। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया, ‘कर्मचारी चयन मंडल के ग्रुप-2, सब ग्रुप-4 और पटवारी भर्ती परीक्षा के घोषित परिणाम के आधार पर ही नियुक्ति की जाए।’

नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के बैनर तले अभ्यर्थी भोपाल के MP नगर चौराहे पर जुटे। संगठन के रंजीत किसानवंशी ने कहा, ‘संगठन की सरकार से स्पष्ट मांग है कि इन नियुक्तियों पर रोक लगाई जाए और राजेंद्र कुमार वर्मा कमेटी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करें।’

अभ्यर्थियों ने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट जारी किए पिछले दरवाजे से 10-15 लाख में पेपर खरीदने वालों को नियुक्ति दी जा रही है। इस परीक्षा में 45 से 50% घोटाला हुआ है। निष्पक्ष जांच होती तो यह तमाम लोग जेल में होते। सरकार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर चंद फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले छात्रों पर कार्रवाई की बात कर रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि एक सदस्य जांच कमेटी के पास जांच के तकनीकी संसाधन नहीं थे। ऐसे में यह जांच केवल बयानों के आधार पर हुई है। एक व्यक्ति का प्रदेशभर में शिकायतों की जांच करना आसान काम नहीं है, क्योंकि यह ऑनलाइन परीक्षा है। बिना टेक्निकल एक्सपर्ट के सभी पहलुओं की जांच करना संभव नहीं है।

सरकार जांच रिपोर्ट स्वीकर करे, हम स्वीकार कर लेंगे

ग्वालियर के रुचिन अरजरिया ने कहा, ‘सरकार से बस इतना कहना चाहता हूं कि आपने क्लीन चिट दी, हम रिपोर्ट स्वीकार कर लेंगे, बस आप रिपोर्ट सार्वजनिक कर दीजिए। यह लड़ाई नौकरी की नहीं, न्याय की है।’ ब्यावरा के राजगढ़ से आए मोहित शर्मा ने कहा, ‘सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को मैंने सबूत दिए थे। 4 सवाल सॉल्यूशन समेत सबमिट किए। आयोग ने मुझे बिना स्टैम्प-सील लेटर दे दिया। पूरे देश में यह एकमात्र भर्ती है, जिसके टॉपर घरों में छिपकर बैठे हैं।’

इन सवालों के जवाब चाह रहे अभ्यर्थी

  • ग्वालियर के एक परीक्षा केंद्र से 10 में से 7 टॉपर और प्रदेश के केवल 3 परीक्षा केंद्रों में से 50 में से 34 टॉपर कैसे आ गए?
  • क्या टॉपर से बातचीत करके उनके बयान लिए गए?
  • क्या उनके बीच के आपसी संबंध और कनेक्शन को चेक किया गया?
  • क्या टॉपर की 10वीं, 12वीं की मार्कशीट की जांच की गई। कुछ चयनित अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने 10वीं और 12वीं की परीक्षा 35% नंबरों से पास की।
  • कुछ चयनित अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जो वनरक्षक भर्ती परीक्षा में फिट थे, लेकिन पटवारी भर्ती परीक्षा में एयर हैंडिकैप्ड यानी उन्हें कानों से सुनाई नहीं देता? यह कैसे संभव है?
  • टॉपर का लॉग इन टाइम चेक किया गया, जिससे यह पता चले कि उसने कितने बजे सिस्टम पर लॉगिन किया?
  • क्या टॉपर की कैंडिडेट रेस्पॉन्स लॉग की जांच की गई, जिससे पता चलता है कि छात्र ने कब और कितने समय में कौन सा जवाब दिया? कब उसने जवाब के विकल्प को बदला?
  • क्या पेपर को 3 घंटे में हल किया या आधे – एक घंटे में ही सारे जवाब फिल कर दिए?
  • मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड यानी ESB के सर्वर की टेक्निकल जांच की गई

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