विध्य क्षेत्र:ओबीसी, ब्राह्मण, गोंड के दम पर दो बार 24 सीट तक पहुंची भाजपा

ओबीसी, ब्राह्मण और गोंड वोटों के दम पर 2008 और 2018 में विंध्य क्षेत्र की कुल 30 में से 24 सीटें जीतने वाली भाजपा 2023 में इसी आंकड़े को दोहराने की ताकत लगा रही है, जबकि उसे सबसे ज्यादा चुनौती भी इसी वर्ग से मिलने के संकेत हैं। सीधी का पेशाब कांड, शहडोल संभाग में गोंड वर्ग का आंदोलन, चार बार के विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट कटना और सतना में मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी का कांग्रेस की तरफ जाना भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।

राह कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है। 2003 से अभी तक कांग्रेस सिर्फ एक बार ही डबल फिगर में गई है। 2013 में कांग्रेस को 30 में से 11 सीटें मिली थीं। इस बार ग्वालियर-चंबल की तरह कांग्रेस विंध्य से भी उम्मीदें लगाकर बैठी है। इसका बड़ा कारण रीवा नगर निगम जीतना है। सिंगरौली निकाय आम आदमी पार्टी के पास चली गई है। स्थिति भांपते हुए भाजपा ने रीवा से विधायक राजेंद्र शुक्ला को मंत्री बनाकर और सांसद रीति पाठक और गणेश सिंह को विधानसभा में उतारकर समीकरण को बदलने का प्रयास किया है। हालांकि दोनों सांसद क्षेत्र में स्थानीय नेताओं की नाराजगी झेल रहे हैं। कांग्रेस ने भी विधायक कमलेश्वर पटेल को सीडब्ल्यूसी (सेंट्रल वर्किंग कमेटी) में लेकर मैसेज दिया है।

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