76 साल में ₹89 से ₹59 हजार पर पहुंचा सोना:देश में हर साल 800 टन सोने की खपत, इसमें से सिर्फ 1 टन का उत्पादन भारत में

हमारे देश में हर साल 800 टन सोने की खपत (डिमांड) होती है। इसमें से सिर्फ 1 टन का उत्पादन भारत में होता है और बाकी आयात किया जाता है। चीन के बाद भारत में ही सोने की सबसे ज्यादा खपत होती है। आजादी के समय यानी आज से 76 साल पहले 1947 में सोना 89 रुपए पर था जो अब 59 हजार पर पहुंच गया है। यानी इसकी कीमत 661 गुना बढ़ी है।

खदानों से निकालकर सोने को किया जाता है शुद्ध
सोना आमतौर पर या तो अकेले या पारे या सिल्वर के साथ मिश्र धातु के रूप में पाया जाता है। कैलेवराइट, सिल्वेनाइट, पेटजाइट और क्रेनराइट अयस्कों के रूप में भी यह पाया जाता है। अब ज्यादातर स्वर्ण अयस्क या तो खुले गड्ढों से आता है या फिर भूमिगत खानों से।

जहां सोना सतह के थोड़ा ही भीतर मौजूद होता है, वहां छोटे-छोटे गड्ढे करके उनमें डायनामाइट भरके धमाके करते हैं। इस धमाके से हुए टुकड़ों को ट्रक में भरकर सोना निकालने के लिए भेज दिया जाता है। जहां सोना सतह के बहुत नीचे होता है, वहां अंडरग्राउंड माइनिंग होती है। इसमें गहरे-गहरे वर्टिकल कॉलम खोदे जाते हैं। उन कॉलम में हॉरिज़ॉन्टल गुफाएं बनाई जाती हैं। फिर उन गुफाओं में अंदर जाकर वहां से धमाके कर चट्टान के टुकड़े इकट्ठे होते हैं।

जैसे भी हो, इन चट्टानों के टुकड़ों को ट्रक में भरकर इन्हें एक मिल भेज दिया जाता है। मिल में इन चट्टान के टुकड़ों से सोना निकालने का काम शुरू होता है। इसके बाद कई और स्टेज के प्यूरिफिकेशन से गुजरने के बाद सोना पिघलाया जाता है और इसके ब्लॉक तैयार कर लिए जाते हैं। फिर ये ब्लॉक आगे और रिफाइनिंग के लिए भेजे जाते हैं। उसके बाद जाकर सोना बाज़ार में पहुंचता है।

धरती से अब तक निकाला 2 लाख टन सोना
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, धरती से अब तक करीब 2 लाख टन सोना निकाला जा चुका है और अब सिर्फ 50 हजार टन ही बाकी है। वहीं भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में धरती के अंदर 1 अप्रैल 2020 तक कुल 5.86 टन सोना ही बचा (रिसोर्स) है।

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