स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने बेटी को पास करवाने के लिए बदल दिए NEET PG के नियम?

NEET PG 2023: नीट पीजी की क्वालिफाइंग कटऑफ घटाकर जीरो पर्सेंटाइल किए जाने का मामला और बढ़ गया है। सरकार ने इसके पीछे अपना मकसद बताते हुए कहा कि जब तक एडमिशन के लिए सीटें खाली रहती हैं, तब तक काउंसिलिंग जारी रहेगी। हेल्थ मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने साफ किया कि जीरो का मतलब यह नहीं है कि जीरो अंक पाने वाले को भी एडमिशन मिल जाएगा, बल्कि जहां तक सीटें रहेंगी, वहां तक एडमिशन होंगे। यह फैसला लिए जाने के बाद कांग्रेस ने भी हमला बोला, वहीं सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स द्वारा विरोध किया जा रहा है। एक यूजर ने दावा किया है कि स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने अपनी बेटी का एडमिशन करवाने के लिए नीट पीजी के नियमों में बदलाव किया है। इस दावे को मंडाविया ने खारिज कर दिया है।

पहले जानिए, क्या किया गया है दावा
नीट पीजी के नियम बदलने के बाद से ही यह मुद्दा सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। कई लोगों ने इस विवाद को स्वास्थ्य मंत्री की बेटी से जोड़ दिया है। पुष्पराज यादव नामक यूजर ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखा, ”नीट पीजी पास करने का स्कोर जीरो क्यों हुआ? किसकी वज़ह से हुआ और किसने कराया?  दिशा मांडविया। जी हां। पीएम मोदी के स्वास्थ्य मंत्री का नाम मनसुख मांडविया है। ये उनकी बेटी हैं। नीट पीजी 2023 में कुल 160 नंबर लेकर आईं, जबकि क्वालीफाइंग स्कोर 291 है।  फिर पप्पा से बोलीं–मुझे पास करवाओ। पप्पा ने पूरी परीक्षा का पासिंग स्कोर 0 करवा दिया। जब बेटी एक डफर हो तो बाप की डॉक्टरी कितनी काम की होगी? न पढूंगा, न पढ़ने दूंगा की तर्ज पर स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। सनातन की खेती का फायदा ऐसे लिया जाता है।” इसके अलावा, भी कई कांग्रेस नेताओं ने भी नीट पीजी के नियमों में बदलाव किए जाने के मामले को उठाया और सरकार पर निशाना साधा है।

मंडाविया ने दिए आरोपों के जवाब
स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने इन आरोपों का जवाब हाल ही में दिया। उन्होंने भारत 24 नामक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि मेरी बेटी नीट में रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाया है और ऐसे में उसके लिए कोई नियम बदलने का सवाल ही नहीं रहता है। वहीं, पीजी में इस साल 20-13 हजार सीटें खाली रहने की संभावना है। एक ओर युवाओं को बाहर जाना पड़ता है, दूसरी ओर सीटें खाली रहती हैं। तीसरी बात यह है कि हम लोग मेडिकल कॉलेज बढ़ा रहे हैं और डॉक्टरों की कमी है। ऐसी स्थिति में हर साल 50% परसेंटाइल को कम करते हैं और 20% तक ले जाते हैं, लेकिन उसके बाद भी सीटें खाली रह जाती थीं।  पहले काउंसलिंग नहीं होती थी और छोड़ दिया जाता था। जब तक सीट न भर जाए तब तक भारत सरकार की ओर से काउंसलिंग होती रहेगी, ताकि स्टूडेंट को प्राइवेट कॉलेज में पैसा देकर एडमिशन लेने की नौबत न आए और मेरिट से ही उसे एडमिशन मिले। जीरो परसेंटाइल का मतलब यह नहीं है कि किसी स्टूडेंट का जीरो नंबर आया है और उसे भी एडमिशन मिल जाएगा। इसका मतलब यह है कि ऊपर से जब तक सीटें खाली हैं, तब तक उसकी काउंसलिंग होती रहेगी और उसे एडमिशन मिल जाए।

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