नेशनल लॉ यूनिवसिर्टी का ऐतिहासिक निर्णय:शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए मासिक धर्म (PERIOD) के समय मिलेगी छात्राओं को छुट्टी

मासिक धर्म के समय महिलाओं को होनी वाली परेशानी को समझते हुए मध्यप्रदेश धर्मशास्त्र लॉ विश्वविद्यालय ( DNLU ) ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मासिक धर्म में अवकाश देने की घोषणा की है। धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने इसका बाकायदा सर्कुलर भी जारी किया है। देश की यह पहली यूनिवर्सिटी है जो कि छात्राओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।

धर्मशास्त्र यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति डॉक्टर शैलेश एन हाडली ने बताया कि स्टूडेंट बार एसोसिएशन ने छात्राओं के मासिक धर्म की छुट्टी को लेकर एक पत्र लिखा था और लंबे समय से मांग भी की जा रही थी कि छात्राओं का जब मासिक धर्म हो तो उनके स्वास्थ्य को देखते हुए छुट्टी दी जाए। प्रभारी कुलपति ने डीन सहित छात्र कल्याण और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की और सर्कुलर जारी किया कि छात्राओं को 6 दिन का पीरियड के समय अवकाश दिया जाएगा। प्रभारी कुलपति ने बताया कि यह छुट्टियां सभी स्टूडेंट्स को प्रत्येक सेमेस्टर जो की पांच माह का होता है उसके अंतर्गत दी जाएगी। सांस्कृतिक और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए दी जाने वाली 6 छुट्टियों का यह हिस्सा होगी। छात्र मासिक धर्म के दौरान इन छुट्टियों का लाभ उठा सकती हैं।

डीएनएलयू के प्रभारी कुलपति के मुताबिक मासिक धर्म की छुट्टी न केवल छात्राओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में मदद करेगी बल्कि मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियां को भी दूर करेगी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक जरूरत को स्वीकार करते हुए हम रूढ़िवादी और वर्जनाओं को इस निर्णय से तोड़ सकेंगे। यह समग्र शैक्षिक अनुभव को भी बढ़ाएगी। बता दे की मध्य प्रदेश की धर्मशास्त्र लॉ यूनिवर्सिटी इस तरह का निर्णय लेने वाली देश की पहला लॉ विश्वविद्यालय है।

2023 मार्च को केरल विश्वविद्यालय( KU) ने महिलाओं के लिए विशेष मासिक धर्म अवकाश और मातृत्व अवकाश की अनुमति देने के आदेश जारी किए थे। विश्वविद्यालय ने सरकारी आदेश को लागू करने का निर्णय लिया था, जिसमें मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान देने के बाद महिला छात्रों के लिए उपस्थित की सीमा 73% तय की गई थी।

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