40 किलो का युवक 4-5 पुलिसवालों को कैसे मार लेगा?:इंदौर में 13 साल पुराने केस में इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट बरी

इंदौर जिला कोर्ट ने 13 साल तक चले केस में युवक (अब इंडस्ट्रियल कंसल्टैंट) को बरी कर दिया है। युवक पर चार से पांच पुलिसकर्मियों से मारपीट का आरोप था। मामले में दिलचस्प बात यह है कि युवक पर जिस समय केस दर्ज किया गया उस समय उसकी उम्र करीब 20 साल और वजन सिर्फ 40 किलो था।

पुलिस ने युवक पर एक पुलिसकर्मी जिसका वजन 65-70 किलो के करीब था उसे उठा कर पटकने का आरोप भी लगाया था। मामले में आरोपी पक्ष के वकील ने कई तरह के तर्क दिए। कोर्ट ने पुलिस से यह भी सवाल किया कि 40 किलो का लड़का 3-4 पुलिस वालों को कैसे मारेगा? कोर्ट ने भी माना कि युवक पर लगाए गए आरोप गलत हैं और युवक को बरी कर दिया गया।

बाणगंगा थाने में 20 दिसंबर 2011 को रमा निगम ने उनके खेत में कब्जा करने और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए सुधीर शर्मा, गौरव, शरद, उत्तम और कालू के खिलाफ केस दर्ज कराया था। सूचना पर सब इंस्पेक्टर आरएस शाक्य, कांस्टेबल मंगलेश्वर सिंह, रावेन्द्र सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह और नागेन्द्र यादव को लेकर पहुंचे।

पुलिस ने आरोप लगाया था कि 20 वर्षीय सुधीर ने मंगलेश्वर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि कांस्टेबल मंगलेश्वर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को उठाकर पटक दिया। आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में एक और एफआईआर दर्ज कर ली गई।

केस दर्ज होने के बाद विवेचना करने वाले एसआई वीरेंद्र सिंह ने आरोपी युवकों की 20 दिसंबर 2011 को गिरफ्तारी दिखाई। दावा किया गया है कि हवालात में पूछताछ के नाम पर थर्ड डिग्री टॉर्चर किया। बन्दूक की बट से भी मारा। बाद में जल्दबाजी में युवकों का मेडिकल करवा दिया। मेडिकल में युवकों के शरीर पर चोट के निशान होने की पुष्टि हुई।

इस पर मामले को दबाने, रफा दफा करने की नीयत से एक एसआई ने आरोपियों को जमानती धारा वाली पहली FIR में तो थाने से ही छोड़ दिया। वहीं शासकीय कार्य में बाधा डालने की गैर जमानती धारा वाली दूसरी FIR में गिरफ्तारी ही नहीं ली। चालान डायरी पेश होने पर आरोपी युवकों ने कोर्ट में पुलिस द्वारा अभिरक्षा में मारपीट करने का बयान दिया। इस आधार पर उन्हें हाईकोर्ट ने जमानत दे दी।

13 साल चले केस में ऐसे हुआ 40 किलो का कंसल्टेंट बरी

जिला कोर्ट में एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे और डॉक्टर रुपाली राठौर ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी केशव सिंह की कोर्ट में अपने पक्षकार सुधीर को लेकर तर्क दिया कि 40 किलो वजन का दुबला पतला युवक 65 किलो से अधिक वजन के कांस्टेबल मंगलेश्वर सिंह को कैसे उठाकर जमीन पर पटक सकता है?

इसके साथ ही डंडों से मारने की बात भी बेबुनियाद बताई। वहीं कहा गया कि पहले केस की फरियादी रमा निगम ने रंजिश के तहत पूरे प्रकरण में पुलिस को साथ लेकर आरोप दर्ज करवाए हैं। वहीं कोर्ट के समक्ष कहा गया कि सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह सिकरवार को जमानती और गैर जमानती धाराओं का ज्ञान ही नहीं है। एफआईआर में दर्ज हॉकी, लट्‌ठ, डंडों, पोल, तार से मारपीट के दौरान फटी पुलिस की वर्दी को विधिपूर्वक न जब्त हुई, न सील बंद की गई।

बलवे के केस में भी दूसरे मजिस्ट्रेट ने किया बरी
इसी तरह रमा निगम के बयानों के बाद दर्ज हुई पहली एफआईआर में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री स्वाति कौशल ने टिप्पणी देते हुए कहा कि रमा ने मामले में बढ़ा-चढ़ाकर बयान दिए हैं। वहीं अनुसंधान अधिकारी ने जब्त सामग्री पर जब्ती चिट लगाकर सील बंद करने से मना कर दिया जो सही नहीं है।

मारपीट में जिस हॉकी, डंडों की जब्ती दिखाई गई, उनकी थाने के माल खाने में जमा करने की कोई पावती या जमा करने के नंबर का खुलासा भी केस में नहीं किया गया, ना ही कोर्ट में पेश किया। जिसे गंभीर गलती माना। र

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