सांसदों के सस्पेंशन पर जंतर-मंतर पर I.N.D.I.A का प्रदर्शन:कांग्रेस बोली- सांसदों को निलंबित करके सदन चलाने का मतलब नहीं, सरकार निरंकुश हो गई है

संसद से विपक्षी सांसदों के निलंबन के खिलाफ शुक्रवार (22 दिसंबर) को I.N.D.I.A के घटक दल जंतर-मंतर पर जुटे। सेव डेमोक्रेसी प्रोटेस्ट (लोकतंत्र बचाओ प्रदर्शन) में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, शरद पवार समेत विपक्षी पार्टियों के कई नेता मौजूद हैं। गठबंधन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सांसदों के सस्पेंशन के विरोध में देशभर में प्रदर्शन करने को कहा है।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मोदी विपक्ष रहित सदन चाहते हैं, लेकिन हम लड़ते रहेंगे। संसद में जो लोग घुसे थे, उन्होंने रंगीन धुआं उड़ाया था, अगर यह कुछ और होता तो देश की स्थिति कुछ और होती।

प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने कहा- हम सदन में सिर्फ गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे थे। इस पर कई सांसदों को सस्पेंड कर दिया।

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि संसद निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है। 700 से ज्यादा सांसद सीधे या अप्रत्यक्ष तरीके से चुनकर आते हैं। सरकार को सांसदों को सस्पेंड करने और इसके बाद सदन चलाने का अथिकार नहीं है। सरकार पूरी तरह से निरंकुश और अलोकतांत्रिक हो गई है।

उन्हें स्पीकर के कहने पर विश्वास क्यों नहीं है- अर्जुन राम मेघवाल
सांसदों के निलंबन पर एक बार फिर सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया। दो केंद्रीय मंत्रियों अर्जुन राम मेघवाल और प्रल्हाद जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मेघवाल ने कहा- स्पीकर संसद का कस्टोडियन (केयरटेकर) होते हैं। लोकसभा स्पीकर ने बार-बार कहा कि वो सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं। उन्हें स्पीकर की बात भरोसा क्यों नहीं है? वे (विपक्षी सांसद) जानबूझकर चुनाव में हार की बदला ले रहे हैं। संसद में घुसपैठ बड़ा मुद्दा है। इसकी जांच करने के लिए कमेटी बना दी गई है, जो अपना काम कर रही है।

फिर उपराष्ट्रपति का अपमान किया गया। कांग्रेस मानती है कि सिर्फ उनके पास सरकार चलाने का अधिकार है। उनको लगता है कि उस व्यक्ति को उपराष्ट्रपति बनना चाहिए, जिसे वे (कांग्रेस) नॉमिनेट करे। वे PM नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को नहीं देख सकते। ये एक तरह से दलित, किसान और पिछड़ी जातियों का अपमान है।

संसद में घुसपैठ, विपक्ष का हंगामा और विपक्षी सांसद निलंबित
13 दिसंबर को लोकसभा में दो शख्स घुस आए थे, उन्हें सांसदों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इसको लेकर विपक्षी सांसद पीएम मोदी और अमित शाह से बयान देने की मांग रहे थे। हंगामे के चलते 14 से 21 दिसंबर तक लोकसभा और राज्यसभा से 146 सांसद सस्पेंड हुए। इसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस के 61 सांसद (लोकसभा से 44, राज्यसभा से 17) हैं।

उधर, 19 दिसंबर को दिल्ली में हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में भी सांसदों के सस्पेंशन का मुद्दा उठा था। विपक्षी दलों ने सांसदों के सस्पेंशन की निंदा की और इसके खिलाफ विरोध करने का फैसला किया।

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