जबलपुर: बाथरूम की छत से टपक रहा पानी, कमरों का प्लास्टर गिरा, शिक्षकों के पद भी खाली

जबलपुर।

धनवंतरी नगर बायपास पर स्थित शासकीय दृष्टिबाधितार्थ उमा. विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र जर्जर भवनों के चलते हादसे की आशंका से भयभीत हैं। वर्षों पुराने भवनों की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। मेंटेनेंस के अभाव में दीवारें और सीलिंग प्लास्टर छोड़ने लगी हैं, जिसके चलते कक्षा में बैठने से भी छात्रों काे डर लग रहा है। यही नहीं भवन क्रमांक-2 में बाथरूम में बीते कई माह से पानी टपक रहा है। छत की टंकी में लीकेज के चलते ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर मौजूद बाथरूम खस्ताहाल स्थिति में पहुँच गए हैं। छात्रों ने बताया कि बाथरूम की पूरी दीवारों पर सीलन है और कई जगहों से पानी टपक रहा है। विद्युत सप्लाई के लिए गई लाइनों में कभी भी शॉर्ट सर्किट हो सकता है। इन सब असुविधाओं और संभावित खतरों के बीच दृष्टिबाधित छात्र कक्षाओं में पढ़ रहे हैं, मैस में बैठकर खाना खा रहे हैं और पानी टपकती बाथरूम के बीच उसका उपयोग भी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि 2019 में 10 लाख 80 हजार रुपए हॉस्टल और स्कूल के मेंटेनेंस के लिए शासन से मिले थे, लेकिन उस राशि का क्या हुआ आज तक कुछ नहीं पता। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन हैं। बता दें कि इस विद्यालय में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के करीब 100 दृष्टिबाधित विद्यार्थी अध्ययन करते हैं।

शिक्षा के मंदिर में शराबखोरी का आरोप

छात्रों ने स्कूल में कर्मचारियों द्वारा शराबखोरी किए जाने का आरोप भी लगाया है। छात्राें का कहना है कि लंबे समय से ऐसी गतिविधियां सामने आ रही थीं। छात्रों की शिकायत के बाद अक्टूबर माह में एक आउटसोर्स कर्मचारी को यहाँ से हटाया जा चुका है। यही नहीं कार्यालय के एक कर्मचारी पर भी नशापत्ती करने के आरोप के बाद हाल में कार्रवाई करते हुए जाँच बिठाई गई है और उक्त कर्मचारी का स्थानांतरण कर दिया गया है।

परिसर में गंदगी, जीव-जंतुओं का खतरा

स्कूल परिसर के भवन न सिर्फ पुराने हैं, बल्कि परिसर में कई जगहों पर गंदगी पसरी हुई है। खेल का मैदान समतल नहीं है। कई जगहों पर झाड़ियाँ उग आई हैं। जीव-जंतुओं का खतरा बना हुआ है। कुछ दिनों पहले ही एक छात्र को साँप द्वारा काटे जाने की घटना सामने आई थी। इसके बाद भी सुधार को लेकर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

शिक्षकों की कमी, कैसे हो पढ़ाई

जानकारी के अनुसार स्कूल में शिक्षकों के 14 पद हैं। इनमें 6 व्याख्याता और 8 स्थाई शिक्षकों के लिए हैं, इसके मुकाबले सिर्फ 2 व्याख्याता और 3 रेगुलर शिक्षक ही पदस्थ हैं। इसके अलावा अतिथि व्याख्याता भी हैं, लेकिन छात्रों का कहना है कि नर्सरी से 12वीं तक अध्यापन के लिए शिक्षकों की संख्या बेहद कम है, ऐसे में उनकी पढ़ाई कैसे होगी।

टूटे वाद्ययंत्रों पर मिल रही संगीत की शिक्षा

छात्रों ने बताया कि स्कूल में संगीत की शिक्षा भी दी जाती है लेकिन संगीत सीखने के लिए जो वाद्ययंत्र हैं वे बरसों पुराने हैं और कई टूट चुके हैं। बरसों से कोई नया यंत्र नहीं खरीदा गया है। ढोलक, तबले फटे हुए हैं। हारमोनियम टूटी हुई है, इसी से ही संगीत के छात्रों को शिक्षा दी जा रही है।

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