मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा बयानः लाड़ली बहना योजना शिवराज की नहीं, असम से शुरू हुई

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भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह कहकर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है कि बहुप्रचारित श्लाड़ली बहना योजना वास्तव में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की देन है. सरमा ने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस योजना की जानकारी दी थी. इसके बाद इस योजना को मध्यप्रदेश में और अब महाराष्ट्र में लागू किया गया. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को मातृशोक गोक पर सांत्वना देने के लिए सोमवार शाम नागपुर पहुंचे यादव ने लोकमत समाचार से खास बातचीत की. मध्यप्रदेश की तर्ज पर महाराष्ट्र में लागू इस योजना को शिवराज सिंह चौहान की देन माना जाता है. दावा है कि इसी योजना की वजह से भाजपा मध्यप्रदेश में पुनः सरकार बना सकी. बहरहाल, मोहन यादव ने इसका श्रेय हिमंत बिस्व सरमा को दिया. उन्होंने कहा कि अब यह योजना महाराष्ट्र में भी लागू की गई है और इसका लाभ भाजपा को अवश्य होगा. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी को बम्पर जीत हासिल होगी. छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए प्रचार कर नागपुर पहुंचे मोहन यादव ने कहा कि भाजपा यह सीट भी जीतेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर जीत दर्ज की है

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संघ मुख्यालय पहुंचे कामकाज की रिपोर्ट दी

मोहन यादव ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय पहुंचकर संघ पदाधिकारियों से मुलाकात की. चर्चा है कि उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक एवं राज्य सरकार के कामकाज पर रिपोर्ट दी. हालांकि, यादव ने दावा किया कि यह केवल औपचारिक मुलाकात थी. वे शहर में थे, इसलिए संघ मुख्यालय चले गए. कहा जा रहा है कि संघ पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश की सभी सीटों पर जीत दर्ज करने पर उनकी सराहना की.

महाराष्ट्र से जल बंटवारे का विवाद हल होगा
छिंदवाड़ा में जामघाट अंतरराज्यीय परियोजना को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा रद्द करने से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में चल रहे जल बंटवारे पर मोहन यादव ने कहा कि वे इस संदर्भ में जानकारी हासिल करेंगे. महाराष्ट्र को उसके अधिकार का पानी दिया जाएगा. दोनों प्रदेश चर्चा से विवाद को सुलझा लेंगे. बता दें कि छिंदवाड़ा के जामघाट में अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना साकार होने से महाराष्ट्र को 10 टीएमसी पानी मिलना था. इस पानी से नागपुर शहर की जल समस्या हल होती.

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