मेडिकल यूनिवर्सिटी: पूर्व वित्त नियंत्रक ने बिना अनुमति चालू खातों में जमा किए 40 करोड़, ऑडिट भी गलत तरीके से किया

मप्र की एक मात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर में हुए एफडी घोटाले के मामले में नया खुलासा हुआ है। घोटाले की शुरुआत 2020 में हो चुकी थी। एसबीआई बैंक के दो चालू खातों में 25 मार्च 2021 और 27 अगस्त 2021 को यूनिवर्सिटी के पूर्व वित्त नियंत्रक रवि शंकर डेकाते ने बिना अनुमति के चालू खातों में 40 करोड़ रुपए जमा कराए थे। 28 फरवरी 2023 को जब यह मामला सामने आया, तब कुलगुरु डॉ. अशोक खंडेलवाल ने उन्हें नोटिस जारी किया।

वित्त नियंत्रक ने कोई जवाब नहीं दिया। खातों का ऑडिट करने वाले अधिकारी जेएल वर्मा को संयुक्त संचालक स्थानीय संपरीक्षा ने गलत और बिना अनुमति के ऑडिट करने पर नोटिस जारी किया था। दरअसल, यूनिवर्सिटी के खातों की जांच करने ऑडिटर वर्मा को वर्ष 2017-18 और वर्ष 2018-19 की जांच करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन ऑडिटर ने यूनिवर्सिटी जाकर वर्ष 2021-22 और 2022-23 के रिकार्ड का ऑडिट कर दिया।

इसके बाद ऑडिटर ने जो रिपोर्ट तैयार की, उसमें 120 करोड़ की एफडी ऑटो रिन्युवल मोड पर न होने की बात सामने आई। हालांकि कुलगुरु का तर्क है कि अब विवि की सभी एफडी राष्ट्रीय बैंक में ऑटो रिन्यूवल मोड पर है। इस मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर जज के अलावा वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति, अन्य अधिकारी भी कर रहे हैं। करीब 4 हजार पेज के रिकॉर्ड की जांच चल रही है।

पूर्व दो कुलगुरु के कार्यकाल में हुई गड़बड़ी

एफडीआर मामले में कुलगुरु टीएन दुबे का कार्यकाल 2020-21 और तत्कालीन कमिश्नर जबलपुर बी चंद्रशेखर(प्रभारी कुलगुरू) 2021-22 के समय गड़बड़ी हुई थी, लेकिन जांच नहीं की गई। पूर्व वित्त नियंत्रक ने दो खाते कुलगुरु के आदेश पर कहते हुए एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा में खुलवाए थे। इनमें 5-5 करोड़ जमा भी किए गए, जो कि ऑटोमेटेड सिस्टम में नहीं थे। जब गलती पकड़ी गई तब ऑटो मोड में कार्यवाही करने के आदेश जारी हुए। प्रारंभिक रिपोर्ट राजभवन को सौंप दी गई है।

मामले की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी

पूरे मामले की जांच कराने हाई लेवल कमेटी तैयार की गई। पूर्व के वर्षों में जिन्होंने गलतियां की है, उनके नाम जल्द ही जांच रिपोर्ट में सामने आएंगे। गड़बड़ी रोकने के लिए एफडी कमेटी का गठन किया गया है। नेशनल बैंक के अलावा अब किसी निजी बैंक में खाते खोले ही नहीं जा सकते हैं।
अशोक खंडेलवाल, कुलगुरु मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर

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