अटल मंदिर में स्थापित कि नरेंद्र मोदी की मूर्ति:विधि विधान से होगी मूर्ति की प्रतिदिन पूजा,साथ में राजमाता विजयाराजे भी विराजी

ग्वालियर में हिंदी दिवस के अवसर पर गुरुवार को एक और नई पहल करते हुए शासकीय अधिवक्ताओं ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया की मूर्तियां स्थापित की है, स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया व नरेंद्र मोदी की मूर्तियों को स्थापित करने से पहले ओम के मंत्रों का जाप करते हुए शासकीय अधिवक्ताओं और मंदिर में पूजा पाठ करने वाले सेवकों ने पूरे विधि विधान के साथ आरती उतारकर इन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया है।

नरेंद्र मोदी, विजयाराजे सिंधिया और अटल बिहारी वाजपेई की मूर्ति की आरती उतारते मंदिर के पुजारी
नरेंद्र मोदी, विजयाराजे सिंधिया और अटल बिहारी वाजपेई की मूर्ति की आरती उतारते मंदिर के पुजारी

अटल जी की मूर्ति 1955 में हुई थी स्थापित

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर ग्वालियर के घोसीपुरा स्थित सत्यनारायण की टेकरी पर देश का इकलौता मंदिर है जहां उनकी मूर्ति स्थापित है, उनके चाहने वाले सुबह शाम मंदिर में पूजा अर्चना करते है। सत्य नारायण की टेकरी पर स्थित इस मंदिर में अटल जी की मूर्ति की स्थापना 1995 में की गई थी तब से प्रति दिन यहां पूजा अर्चना की जाती है।

गुरुवार को इस मंदिर में स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करीब डेढ़ फीट की ऊंचाई की दोनों मूर्तियों को पूरे विधि विधान से स्थापित किया गया, अब इस मंदिर में अटल जी की मूर्ति के साथ-साथ स्थापित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजमाता सिंधिया की मूर्ति की भी हर रोज पूजा अर्चना की जाएगी।

हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग

प्रधानमंत्री मोदी की मूर्ति स्थापित करने वाले हिंदी प्रेमी अखिल भारतीय युवा अभिभाषक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष है, और वे देश विदेश में हिंदी के समर्थन में आयोजन करते हैं। उन्होंने भारत नेपाल सहित कई देशों में अब तक करीब 56 सम्मेलन कर चुके हैं, उनकी मांग है कि हिंदी को अब राष्ट्र भाषा घोषित कर देना चाहिए।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए शासकीय अधिवक्ता विजय सिंह चौहान ने प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी की मूर्ति स्थापित करने की बड़ी वजह बताते हुए कहा कि वे हिंदी के बहुत बड़े सेवक है, वे अटल जी की ही तरह हिंदी के लिए समर्पित हैं इसलिए मैंने हिंदी दिवस पर अटलजी के साथ ही उनकी मूर्ति स्थापित की है। विजय सिंह चौहान ने कहा कि राजमाता विजया राजे सिंधिया ने भी हिंदी के लिए बहुत काम किया था , मैं तीनों से व्यक्तिगत रूप से मिला था और हिंदी के प्रति उनकी भावना का सम्मान करता हूँ।

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