अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं ने उठाई लाठी:जबलपुर के गांव में सुबह-शाम निकाल रहीं रैली; 4 दिन में सुधरने का दिया अल्टीमेटम

जबलपुर के एक गांव में अवैध शराब को लेकर महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गांव में अवैध शराब बेचने और पीने वालों को चार दिन का अल्टीमेटम दिया है। पिछले दो दिन से 50 से ज्यादा महिलाएं रोजाना लाठी लेकर गांव में मार्च निकाल रही हैं। गांव की सरपंच का कहना है कि शराब के कारण घर बर्बाद हो रहे हैं। इस कारण गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है।

दैनिक भास्कर ने पुलिस अफसरों को इस बारे में बताया तो सोमवार को खमरिया टीआई आशीष कुमार को मौके पर भेजा गया। यहां चार लोगों पर आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रिठौरी गांव में सुबह-शाम 50 से ज्यादा महिलाएं जब हाथ में लाठी लेकर ‘अवैध शराब बंद करो’ का नारा लगाते हुए निकलती हैं तो हर किसी की नजर उन पर जम जाती है। रैली में शामिल बहू, बेटियां और बुजुर्ग महिलाएं लोगों को शराब नहीं पीने और नहीं बेचने की समझाइश देती हैं।

इन महिलाओं का कहना है कि पिछले दो साल में शराब पीने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। दो लोगों की मौत जनवरी 2024 में ही हुई है। खमरिया पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई महज दिखावे के लिए की गई।

50 से ज्यादा परिवार बना रहे अवैध शराब

रिठौरी गांव पनागर विधानसभा क्षेत्र में आता है। जनसंख्या करीब चार हजार से ज्यादा है। गांव में बंजारा, पटेल और गोटिया समाज के लोग अवैध शराब बेचने के काम में लिप्त हैं। नहर किनारे 50 से अधिक परिवार लंबे समय से अवैध शराब बनाते और बेचते हैं। कई बार पुलिस ने कार्रवाई की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। लोगों ने भी समझाया, लेकिन शराब बनाना बदस्तूर जारी है।

उठाया नशामुक्ति का बीड़ा, सुधरने लगे हालात

रिठौरी की महिलाओं ने शुक्रवार को एकजुट होकर नशामुक्त अभियान के लिए लाठियां थाम लीं। तय किया गया कि रोजाना सुबह-शाम रैली निकाली जाएगी। शुरुआत में चार दिन तक शराब पीने और बेचने वाले को समझाइश दी जाएगी। नहीं मानने पर लाठी से पिटाई भी करेंगे।

महिलाओं का दावा है कि कुछ लोगों ने शराब छोड़ भी दी है, लेकिन अधिकांश लोग इस काम में लगे हैं।

शराब पीकर पति मर गया, कोई और नहीं मरेगा

गांव में ही रहने वाली रत्तू बाई ने बताया- पति दिन भर मजदूरी करता। शाम होते ही शराब पीने चला जाता। कई बार समझाया। झगड़ा भी हुआ, लेकिन नहीं माना। कई बार तो भूखा तक सोना पड़ा। शराब की लत के कारण बीमार पड़ गया। इतने पैसे नहीं थे कि इलाज हो पाता। आखिर पति ने खुद को आग लगाकर सुसाइड कर लिया।

समझाइश दी, अब लाठी उतारेगी नशा

राजकुमारी का कहना है कि अभी तक कुछ लोग नशे में धुत मिले, तो उन्हें समझाया गया है। गांव में जितने भी लोग शराब बनाकर बेचते हैं और पीते हैं, उन्हें भी समझाइश दी जा रही है। चार दिन का समय दिया गया है कि गांव में जो भी अवैध शराब बेच रहे हैं, वो धंधा बंद कर दें। इसके बाद नशा उतारने के लिए लाठियों का उपयोग करना होगा।

महिलाओं की मुहिम को सरपंच का समर्थन

शराब विरोधी अभियान में गांव की सरपंच सरोज रजक भी शामिल हैं। सरोज का कहना है कि नशा मुक्ति के अभियान को बहुत पहले शुरू हो जाना चाहिए था, जिससे जहरीली शराब से लोगों की मौत नहीं होती। शराब पीकर बच्चों और महिलाओं के साथ आए दिन मारपीट की घटनाएं होती हैं। जब कभी पुलिस आती है तो अपराधियों को पकड़ती जरूर है, लेकिन कुछ दिन बाद छोड़ देती है। शराब बेचने वालों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

इन लोगों ने शराब के कारण किया सुसाइड

रज्जन चौधरी (38) ने 2022 में खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पूरी कमाई शराब में खर्च कर देता था। बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई थी। पत्नी से विवाद भी होता था। घटना वाले दिन शराब पीकर रज्जन घर पहुंचा तो पत्नी से विवाद हो गया।

मिलन पटेल (35) नशे में धुत होकर फंदे पर झूल गया। मिलन सप्ताह भर मजदूरी करता, जो भी पैसा मिलता, उसे शराब में उड़ा देता था। पत्नी जब घर चलाने के लिए पैसे मांगती, तो विवाद करता था।

सोनू ठाकुर (23) ने जनवरी 2024 में फांसी लगा ली। उसकी शादी तीन साल पहले हुई थी। दो साल का बेटा है। सोनू दिन भर मजदूरी करके जो कमाता था, वह शराब में खर्च कर देता था। उस पर कर्ज हो गया था।

रामदास चौधरी (39) ने भी जनवरी 2024 में फांसी लगाई। वह शराब पीकर घर पहुंचा तो पत्नी ने पैसे मांगे। इसी बार पर दोनों में विवाद हो गया। रामदास ने पत्नी की पिटाई कर दी। इसके बाद फंदे पर झूल गया।

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