पुलिस की गोली आर-पार हुई, हड्‌डी टूट गई:अयोध्या जाते समय चंबल नदी में हुई पुलिस और किसान की मुठभेड़ की कहानी

1990 में विवादित ढांचे पर ध्वज फहराने के लिए एक जत्था अयोध्या रवाना हुआ। घरवालों के मना करने के बाद भी मैं कारसेवकों के साथ ध्वज लेकर अयोध्या के लिए निकल पड़ा। भिंड से आगे एमपी-यूपी बॉर्डर पर पुलिस से सामना हो गया। हमें आगे बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने लाठी भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े। हमने मिर्च पाउडर फेंका तो पुलिस ने गोली चला दी। एक गोली मेरे दाएं हाथ को चीरती हुई आर-पार हो गई।

मैं बेहोश होकर गिर गया। जब होश आया तो ग्वालियर के अस्पताल में था। यहां पता चला हाथ की हड्‌डी टूट गई है। 18 दिन बाद घर लौटा, हालांकि अयोध्या तक नहीं पहुंच पाने की कसक मन में थी। दो साल बाद यानी 1992 को कारसेवकों के साथ फिर से अयोध्या पहुंचा। 6 दिसंबर को एक-एक कर कारसेवक गुंबद पर चढ़ गए। गुंबद तोड़ने में दिक्कत आ रही थी, यह देख मैंने आवाज लगाई।



दीवार तोड़ो, गुंबद खुद-ब-खुद धराशायी हो जाएगा। शाम को गुंबद के मलबे से हमें रामलला का सिंहासन, घंटा समेत अन्य सामग्री मिली, जिसे हमने दीवार बनाकर चबूतरे में विराजित किया और वहां से लौट आए। शाम को हर घर में दीपक जल उठे। लोगों ने दिवाली मनाई।’

राम मंदिर से जुड़ी ये कहानी राजगढ़ के माचलपुर के गांव झरन्या के रहने वाले किसान नानूराम गुर्जर ने सुनाई। बोले- 22 जनवरी को रामलला अयोध्या में अपने घर विराज रहे हैं। वो कितना भावुक पल होगा। इसी पल को जीना चाहता हूं, अयोध्या से निमंत्रण तो नहीं आया, फिर भी जा रहा हूं। हमसे बात करते हुए उन्होंने पूरी तैयारी की और मोबाइल पर ‘राम आएंगे’… भजन सुनते हुए झोला उठाकर अयोध्या के लिए घर से निकल पड़े।

नानूराम कहते हैं- 90 के दशक मैं संघ के कार्यक्रमों में जाया करता था। आज मैं 70 बरस का हो चुका हूं, तब मेरी उम्र 35 वर्ष के करीब रही होगी। 1990 में रामलला को लेकर आंदोलन तेज हो चुका था। एक दिन पता चला कि कारसेवक विवादित ढांचे पर ध्वज फहराने अयोध्या कूच करने वाले हैं। मैं भी उनके साथ जाना चाहता था, लेकिन घर से परमिशन नहीं मिली।

आखिरकार ठान लिया कि अयोध्या जाऊंगा। घरवालों के मना करने के बाद भी कारसेवा के लिए झोला उठाया और निकल पड़ा। माचलपुर से स्व. तुलसीराम बैरागी, स्व. विष्णुगोपाल जोशी, बालचंद मारू, कैलाश खिंची, गोविंद सर्राफ, दीपक दुबे समेत अन्य कारसेवकों की टोली आगे बढ़ रही थी। चंबल नदी पर स्थित इटावा पुल, जो कि आधा मध्यप्रदेश और आधा उत्तर प्रदेश की सीमा में आता था। यूपी सरकार ने बॉर्डर को पूरी तरह से सील कर दिया था।

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