नर्मदापुरम में होशंग शाह की दरगाह के अस्तित्व पर सवाल:पूर्व नपा अध्यक्ष बोले- संत रामजी बाबा से दोस्ती झूठी, चादर चढ़ाने की परंपरा गलत

नर्मदापुरम शहर में संत रामजी बाबा – होशंग शाह गौरी बाबा की दोस्ती और कौमी एकता की मिसाल के लिए चढ़ाई जाने वाली चादर परंपरा पर सवाल उठाया गया है। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक अखिलेश खंडेलवाल ने चादर चढ़ाने की परंपरा को झूठा बताया। उन्होंने मजार और गौरी शाह – रामजी बाबा की दोस्ती पर भी सवाल उठाए।

खंडेलवाल ने बुधवार को सतरास्ते स्थित हनुमान मंदिर में दश विधि स्नान, पंचगव्य प्रासन, हेमाद्रि प्रायश्चित यज्ञ किया। उन्होंने कहा, ‘वैशाख पूर्णिमा पर मेला लगता है। इसके शुभारंभ अवसर पर रामजी बाबा की समाधि से गौरी शाह बाबा की दरगाह तक यात्रा निकालकर चादर चढ़ाने की परंपरा है। यह झूठी परंपरा 25 साल से चली आ रही है। 2014 – 2019 में नपा अध्यक्ष रहते हुए इस परंपरा के मैंने भी निभाया, इसलिए हनुमानजी के दरबार में प्रायश्चित यज्ञ किया।’

दोनों समकालीन थे ही नहीं

खंडेलवाल ने कहा, ‘संत रामजी बाबा और गौरी शाह समकालीन थे ही नहीं, तो इनकी दोस्ती का सवाल ही नहीं उठता है। होशंग शाह गौरी सन् 1400 में थे और रामजी बाबा का समयकाल सन् 1600 का है। जिस मजार पर चादर जाती है, अब तो उसके अस्तित्व पर ही प्रश्न है।’

‘वाणी भाष्य’ पुस्तक में बालागंज में बताई मजार

माघ की पूर्णिमा को रामजी बाबा की समाधि स्थल पर उनकी स्मृति में मेला लगता है। उन पर लिखी गई पुस्तक ‘वाणी भाष्य’ में कहीं भी राम जी बाबा ने गौरी शाह की दरगाह पर चादर चढ़ाने का जिक्र नहीं किया है। हालांकि, पुस्तक में गौरी शाह से रामजी बाबा की दोस्ती का जिक्र जरूर मिलता है। लिखा है- दोनों में बड़ा स्नेह था। एक-दूसरे के यहां आना-जाना था। गौरी शाह की दरगाह बालागंज मोहल्ले में होना बताया गया है। जबकि, दरगाह रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर ग्वालटोली में है।

सेवादार बोले- दरगाह 600 साल पुरानी, बालागंज ज्यादा दूर नहीं

दरगाह पर असगर शाह सेवा कर रहे हैं। उनके भाई चांद ने बताया कि दरगाह पर खिदमत करते हुए हमारे परिवार की 10 पीढ़ी गुजर गई। हम 11वीं पीढ़ी के हैं। उनका कहना है कि बालागंज से दरगाह का क्षेत्र ज्यादा दूर नहीं है। केवल रेलवे ट्रैक का फर्क है। दरगाह करीब 600 साल पुरानी है। उस समय तो रेलवे ट्रैक नहीं था। 600 साल पहले शहर भी छोटा हुआ करता था।

नगर पालिका कराती है चादर चढ़ाने का आयोजन

रामजी बाबा समाधि से दरगाह पर चादर चढ़ाने का आयोजन नगर पालिका की ओर से होता है। दरगाह की रंगाई – पुताई भी पालिका कराती है। चादर चढ़ाने की परंपरा पर उठ रहे सवाल को लेकर नगर पालिका सीएमओ नवनीत पांडे ने कहा, परिषद और अध्यक्ष जो भी निर्णय लेंगे, वैसा किया जाएगा।’

खंडेलवाल बोले- चुनरी यात्रा निकालें

नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल ने कहा, ‘नगर और जिला प्रशासन से मेरा आग्रह है कि इतिहास के आधार पर चादर चढ़ाने की परंपरा की जांच करें। अगर गलत है तो उस परंपरा को बंद करें। जो सही व्यक्ति है, उसकी मजार पर चादर ले जाकर चढ़ाने का प्रयास करें। यही उनकी दोस्ती को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। चादर यात्रा बंद कर मां नर्मदा तक चुनरी यात्रा निकाली जानी चाहिए।’

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