इंदौर में ‘दरबार’ की BJP में जाने की कहानी:बेटे का पॉलिटिकल करियर चिंता; एक वजह ये भी..

इंदौर के महू से कांग्रेस से निष्कासित कद्दावर नेता और पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार शुक्रवार को बीजेपी में शामिल हो गए। दरबार ने पिछला विधानसभा चुनाव पार्टी से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद से ही दरबार बीजेपी के बड़े नेताओं के संपर्क में बने हुए थे।

दरबार के पिछले 2 महीने से बीजेपी में जाने की चर्चा थी। करीबियों का कहना है कि दरबार कांग्रेस आलाकमान की कार्यप्रणाली से नाखुश थे। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि दरबार को अब कांग्रेस में कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा था। इसीलिए उन्होंने बीजेपी में जाना ही ठीक समझा।

वो 2 बड़े कारण, जिनके चलते दरबार ने किया कांग्रेस से किनारा…

  • राम किशोर शुक्ला को टिकट मिलने से थे दुखी

2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी से आए राम किशोर शुक्ला को महू से प्रत्याशी बनाया था। इससे दरबार काफी दुखी हुए। तब आलाकमान से यह कहा था कि शुक्ला के अलावा किसी अन्य को प्रत्याशी बनाएं, वे खुद उसको जीत दिलाने के लिए महू में काम करेंगे लेकिन दरबार की नहीं सुनी गई। सूत्रों के अनुसार दरबार ने यह दलील भी दी थी कि 2008 का चुनाव वह शुक्ला के बीजेपी में जाने की वजह से ही हारे थे। अन्यथा वह वे कैलाश विजयवर्गीय को हरा देते। यानी 2008 और 2023 दोनों ही हारे में उनकी राह का कांटा रामकिशोर शुक्ला बने, जो उनके पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।

  • बेटे का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना

दरबार के बीजेपी में जाने पर राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि अंतर सिंह दरबार ने 2 नवंबर 2023 को जब कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। तब से ही वह किसी भी कांग्रेसी नेता के संपर्क में नहीं थे। चुनाव परिणाम के बाद वह समझ गए थे कि कांग्रेस में उनका राजनीतिक भविष्य नहीं बचा है। दरबार ने बीजेपी में जाकर बेटे के लिए राजनीतिक भविष्य की तलाश शुरू कर दी है।

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि दरबार वर्तमान में बीजेपी में बिना किसी शर्त के शामिल हुए हैं।

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