तीन मिनट देर से पहुंचे छात्र, नहीं मिला परीक्षा देने:छात्रा बोली- रोती रही, लेकिन टीचर को रहम नहीं आया; केन्द्राध्यक्ष ने कहा-नियम का पालन किया

मैंने जितना टीचर के सामने रोया, उतना अगर भगवान के सामने रोती, तो शायद वो भी मेरी सुन लेते, पर टीचर ने नहीं सुनी…परीक्षा के लिए मैंने इतनी मेहनत की रात-रात भर नहीं सोई, पर एक ही झटके में केन्द्राध्यक्ष मैडम ने मेरा भविष्य खराब कर दिया। मैं सुबह 8 बजकर 33 मिनट पर स्कूल आ गई थी। विश्वास नहीं है, तो वहां खड़े सभी लोगों से पूछा जा सकता है। इसके बाद भी जाने नहीं दिया गया। मैं रोती रही। बेहोश तक हो गई, पर किसी ने नहीं सुनी…

ये पीड़ा है उस छात्रा की जिसका कि एक झटके में ही केन्द्राध्यक्ष दीप्ति शर्मा ने भविष्य खराब कर दिया। अब छात्रा को एक बार फिर से सप्लीमेंट्री की परीक्षा देनी होगी। जबलपुर के खालसा हायर सेकेंडरी स्कूल में दसवीं परीक्षा के दौरान छह छात्रों को इसलिए परीक्षा से वंचित कर दिया गया, क्योकि ये परीक्षा केंद्र तक आने में चंद मिनट लेट हो गए। 9 फरवरी को दसवीं क्लास का संस्कृत का पेपर था। ठंड के बीच 10 किलोमीटर दूर से छात्रा जैसे-तैसे परीक्षा केंद्र पहुंची तो उसे परीक्षा देने नहीं दिया गया। केन्द्राध्यक्ष का कहना था कि जिन छात्रों को परीक्षा देने नहीं दिया गया है, वो लोग 8 बजकर 57 मिनट पर स्कूल पहुंचे थे।

केन्द्राध्यक्ष को नहीं आया छात्रों पर रहम

जबलपुर में 10वीं में पढ़ने वाले छह छात्रों को संस्कृत का पेपर नहीं देने दिया। केन्द्राध्यक्ष ने 8 बजकर 30 मिनट पर स्कूल के गेट बंद करवा दिए। छह छात्र परीक्षा देने स्कूल पहुंचे तो गेट नहीं खोला गया। स्कूल की प्यून ने मानवता दिखाते हुए बच्चों को बाहर खड़े देखकर गेट खोलने की कोशिश की, तो केन्द्राध्यक्ष ने प्यून से चाबी छीनकर रख ली। बच्चे स्कूल के बाहर खड़े होकर माफी मांग रहे थे, पर केन्द्राध्यक्ष दीप्ति शर्मा को रहम नहीं आया। अखिरकार परीक्षा का समय निकल गया। बच्चे बाहर खड़े रहे। उन्हें परीक्षा नहीं देने दी गई।

सोनपुर से आई छात्रा ने बताया कि पिता मजदूरी करते हैं। मुश्किल से पढ़ाई करवा रहे थे। अब परीक्षा देने नहीं मिला है। अगर एक विषय में फेल होती हूं, तो साल बर्बाद हो जाएगा। पिताजी कह रहे हैं कि कोई जरूरत नहीं है पढ़ाई करने की। छात्रा रितु कुशवाहा का कहना था कि सिर्फ कुछ मिनट लेट हुए, तो उसकी इतनी बड़ी सजा दी गई है कि हमारा भविष्य ही बर्बाद हो गया।

मां प्राइवेट अस्पताल में नर्स- मुश्किल से दे पाती है फीस
रिछाई में रहने वाले छात्र अंश ने बताया कि रात भर पढ़ाई की सुबह ठंड भी बहुत थी, इसलिए परीक्षा केंद्र आने में सिर्फ कुछ मिनट ही लेट हो गए। हमारे सामने ही स्कूल का गेट लग गया। हम लोग मैडम से माफी मांगते हुए कह रहे थे कि दोबारा गलती नहीं होगी, पर केन्द्राध्यक्ष मैडम ने स्कूल का गेट हमारे सामने बंद कर दिया। प्यून आंटी ने गेट खोलने की कोशिश की, तो दीप्ति मैडम ने उनसे चाबी छीन लिया। अंश ने बताया कि मां प्राइवेट अस्पताल में नर्स है। मुश्किल से घर चल रहा था। अब तो लगता है कि आगे की पढाई बंद करनी होगी, क्योंकि परीक्षा में बैठे नहीं है अनुपस्थिति लगेगी। बाकी के पेपर देने में भी मन नहीं लग रहा है, क्योंकि हमें पता है कि आने वाले सभी पेपर अच्छे से करेंगे तो भी सप्लीमेंट आना तो निश्चित ही है।

क्या हुआ, प्यून ने बताई घटना
परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होनी थी। ये सभी बच्चे 8 बजकर 40 मिनट पर आ गए थे। मैंने ताला खोलने की कोशिश की, तो केन्द्राध्य़क्ष मैडम ने मुझसे चाबी छीनकर रख ली। बच्चे रोते रहे पर मैडम ने गेट नहीं खोला। स्कूल की प्यून चंदा हथाले ने बताया कि 8 फरवरी को भी 12वीं की परीक्षा के दौरान दो छात्रों को परेशान किया गया। एक छात्र के पिता की मौत नागपुर में हो गई थी। छात्र पिता की डेड बॉडी घर पर रखकर परीक्षा देने पहुंचा, तो भी केन्द्राध्यक्ष ताला नहीं खोल रहीं थी। छात्रा जब रोने लगी तब जाकर केन्द्राध्यक्ष ने ताला खोला और फिर छात्र अंदर आए। प्यून ने बताया कि सभी टीचर के लिए चाय बनाना था, मैं दूध लेने स्कूल से बाहर चली गई तो मुझे भी एक घंटे तक स्कूल के बाहर खड़ा रखा।

हंगामे के बीच होम एग्जाम किए गए रद्द
छह छात्रों को परीक्षा देने नहीं दिया गया। परिजन सहित पड़ोस में रहने वाले लोगों ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल का गेट खोलने की मांग की पर गेट नहीं खुला। हंगामे की जानकारी मिलते ही रांझा थाना पुलिस के स्टाफ मौके पर पहुंच गया। रांझी थाने में पदस्थ एसआई शैलेन्द्र सिंह ने भी स्कूल का गेट खोलने को कहा पर गेट नहीं खुला। हंगामा होते देख केन्द्राध्यक्ष ने अन्य टीचरों के साथ अपने आपको एक कमरे में बंद करवाकर बाहर से ताला लगवा लिया। बड़ी मुश्किल से स्कूल का गेट खोला गया। खालसा स्कूल में दोपहर 1 बजे से होम एग्जाम होना था, पर दोपहर दो बजे तक स्कूल में हंगामा चला, अखिरकार परीक्षा रद्द की गई। खालसा स्कूल के अध्यक्ष कमलजीत सिंह का कहना है कि बोर्ड परीक्षा को छोड़कर अन्य क्लास की परीक्षा दोपहर एक बजे से होनी थी, पर हंगामा होने के कारण समय पर परीक्षा शुरू नहीं की गई, इसलिए परीक्षा रद्द कर दी गई है।

शासन के नियम का किया गया है पालन
छह बच्चों को परीक्षा में शामिल न करने पर पांच घंटे तक स्कूल के बाहर हंगामा चलता रहा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र भी पहुंच गए और केन्द्राध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। केन्द्राध्यक्ष दीप्ति शर्मा का कहना था कि जो भी कार्रवाई की गई है, वो माध्यमिक शिक्षा मंडल के निर्देश पर हुई है। केन्द्राध्यक्ष का कहना था कि छह छात्र 8 बजकर 57 मिनट पर परीक्षा केंद्र आए थे। नियम के मुताबिक साढ़े 8 बजे तक एंट्री थी, उसके बाद 10 मिनट तक और अतिरिक्त दिया गया। 8:40 पर परीक्षा केंद्र में किसी भी छात्र को आने नहीं दिया जाएगा। दीप्ति शर्मा का कहना है कि जो छह बच्चे परीक्षा में नहीं बैठ पाए है , अब उनके लिए बोर्ड जो निर्देश देगा, उसके अनुसार ही काम होगा।

जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी गई है रिपोर्ट
कुछ मिनट देर से परीक्षा केंद्र आने पर छह छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग में पदस्थ उप संचालक डीके खरे का कहना है कि जानकारी मिली है कि देरी से परीक्षा केंद्र में पहुंचने वाले छह छात्रों को संस्कृत की परीक्षा से वंचित रखा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी जा रही है। परीक्षा न दे पाने वाले छह छात्रों के लिए आगे क्या किया जा सकता है। इसके लिए भी माध्यमिक शिक्षा मंडल से बात की जा रही है।

अब क्या होगा छात्रों का
शिक्षकों पर छात्रों का भविष्य संवारने का जिम्मा होता है। शिक्षक ही उन्हें पढ़ा लिखाकर काबिल बनाते है, पर जबलपुर में एक शिक्षक की थोड़ी सी जिद ने छह छात्रों का भविष्य खराब कर दिया। दसवीं क्लास में पढ़ने वाले छह छात्र संस्कृत का पेपर नहीं दे पाए है। अब इन छात्रों को संप्लीमेंट्री देना होगा। इसके बाद भी अगर ये छात्र एक विषय में और फेल हो जाते है तो इन्हें दो विषय में संप्लीमेंट्री देने की पात्रता है।

कलेक्टर ने की थी छात्रा की परीक्षा में मदद
सिहोरा के शासकीय वीडी सेकंडरी स्कूल की कक्षा 10 वीं की छात्रा जीनत निशा का एडमिट कार्ड बोर्ड भोपाल से नहीं आया। छात्रा जीनत और उसके परिजन चिंतित हो उठे। कलेक्टर दीपक सक्सेना को जब जानकारी लगी तो परीक्षा शुरू होने के एक घंटे के भीतर भोपाल से विशेष अनुमति दिलाकर छात्रा को परीक्षा में शामिल करवाया।

सोमवार 4 फरवरी को हिंदी का पहला पेपर था, लेकिन जीनत का एडमिट कार्ड माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल से नहीं आया, जिससे छात्रा जीनत और उसके परिजन चिंतित हो उठे। उन्हें लगा कि जीनत परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएगी। उसका साल खराब हो जाएगा। परीक्षा शुरू होने तक एडमिट कार्ड के लिए प्रयास जारी रखा। सोमवार को परीक्षा शुरू होने से पहले करीब 7.30 बजे कलेक्टर दीपक सक्सेना को छात्रा जीनत की समस्या से अवगत कराया।

कलेक्टर सक्सेना ने तत्काल भोपाल अधिकारियों से बात की। विशेष अनुमति से छात्रा जीनत को परीक्षा में सम्मिलित करा दिया। केन्द्राध्यक्ष की जिद के कारण संस्कृत की परीक्षा से महरूम हुए छात्रों ने कलेक्टर से विनती की है कि हमारे लिए भी कुछ प्रयास करें, जिससे संस्कृत का पेपर दे सकें।

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