तहसीलदार कहते थे- कहना मानोगी, तो खूब पैसा कमाओगी: परेशान महिला कर्मचारी ने कराया ट्रांसफर

ग्वालियर में एक तहसीलदार के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत की गई है। इसमें कहा गया है कि तहसीलदार ने महिला कर्मचारी को इतना परेशान कर दिया कि उसे ट्रांसफर कराना पड़ा। मामला सामने आने के बाद तहसीलदार को भी हटा दिया गया। महिला ने परिवाद समिति की जांच पर भी सवाल उठाया है। परिवाद समिति में मामले को चलते हुए करीब एक महीना होने को आया है, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। नाम उजागर न करने की शर्त पर पहली बार  महिला कर्मचारी ने दर्द बयां किया।

महिला कर्मचारी का कहना है कि एक महिला समाजसेवी ने शिकायत की थी। वह उसे नहीं जानती, लेकिन शिकायत सही है।

पहले जानिए, कब क्या शिकायत की गई

सिटी सेंटर तहसील कार्यालय में जुलाई 2023 में शत्रुघ्न सिंह चौहान ने बतौर तहसीलदार जॉइन किया। 4 अप्रैल 2024 को महिला सामाजिक कार्यकर्ता ने कलेक्टर रुचिका चौहान से शिकायत की। कहा गया- तहसीलदार महिला कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार करते हैं, जो प्रताड़ना की श्रेणी में आता है। इसी के चलते एक महिला कर्मचारी ने फरवरी 2024 में एडीएम ग्वालियर अंजू अरुण को पत्र लिखकर तबादले की बात कही थी। उसका तबादला भी कर दिया गया था। 6 अप्रैल को स्थानीय परिवाद समिति को इसकी जांच सौंप दी। अगले दिन 7 अप्रैल को कलेक्टर ने तहसीलदार को सिटी सेंटर तहसील कार्यालय से हटाकर कलेक्टर ऑफिस अटैच कर दिया।

तत्कालीन तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान को सिटी सेंटर तहसील कार्यालय से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।
तत्कालीन तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान को सिटी सेंटर तहसील कार्यालय से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।

तहसीलदार कहते थे- तुम किसी की बन जाओ

पीड़ित महिला कर्मचारी ने बताया कि ‘तत्कालीन तहसीलदार ने विधानसभा चुनाव में सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक मुझे एमएलबी कॉलेज (मतदान सामग्री केन्द्र) पर बिना ड्यूटी के बैठाए रखा। वह कहते थे कि लगता है तुमने कभी किसी अधिकारी से नजदीकी नहीं बनाई, जवाब में मैंने कहा कि यह गलत है। उनका कहना था कि प्रेम का मतलब यह नहीं होता कि तुम किसी के बन जाओ। प्रेम कई तरह का होता है। भाई-बहन का भी प्रेम होता है।

किसी न किसी बहाने मुझे बुला लेते। परेशान करने के लिए जो काम मेरा नहीं होता था, वह भी थमा देना। मैं उनके साथ काम करने में सेफ महसूस नहीं करती थी। कई बार ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जो कहने में भी असहज महसूस कर रही हूं। ऑफिस में भी एक-दो लोगों को बताया था, लेकिन वह आगे नहीं आना चाहते थे। सब कुछ जानकर भी अंजान बने रहे। इस कारण मजबूरन मैंने तबादला करा लिया।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *