खुद के अपहरण की कहानी गढ़ने वाली छात्रा का सच:झूठ पकड़ा गया तो इंदौर में कमरा बदला; कुछ दिन अमृतसर के गुरुद्वारे में काटे

राजस्थान के कोटा से गायब हुई शिवपुरी की छात्रा काव्य धाकड़ (20) को 2 दिन पहले इंदौर पुलिस ने बरामद कर लिया। वह यहां सागर के रहने वाले अपने दोस्त हर्षित के साथ किराए के कमरे में छिपी थी। दोनों ने 4 दिन पहले अपना ठिकाना बदला था। इंदौर पुलिस ने उनको कोटा पुलिस को सौंप दिया है।

काव्या को गुरुवार को कोटा में कोर्ट में पेश किया गया। उसके बयान हुए। कोटा के विज्ञान नगर थाने में केस दर्ज है। दोस्त हर्षित से शुक्रवार को पुलिस पूछताछ करेगी। बताया जाता है कि दोनों में प्रेम प्रसंग है। दोनों ने विदेश जाने की तैयारी की थी। पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दिया था और रुपयों की व्यवस्था करने के लिए ही हर्षित के साथ मिलकर अपहरण की साजिश रची।

रूम से कम ही निकलते थे बाहर

​​​कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि दोनों 29 मार्च को यहां रहने आए थे। किसी से बात नहीं करते थे। पता नहीं था कि ये दोनों वही है, जिन्हें राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस ढूंढ रही है। दोनों बाहर कम ही निकलते थे। जरूरत पड़ती भी, तो लड़की चेहरे पर स्कॉर्फ बांधकर बाहर निकलती थी। किराना दुकान से चिप्स-बिस्किट लेकर दिन काटते रहे। चौथे दिन इंदौर क्राइम ब्रांच उनके नए ठिकाने पर पहुंच गई।

पैसा नहीं था तो अमृतसर गुरुद्वारे में भी रहे

काव्या मूलरूप से शिवपुरी के बैराड़ की रहने वाली है। पिता रघुवीर धाकड़ को 18 मार्च को उसने अपहरण का मैसेज भिजवाया था। परिवार को लगा कि लड़की कोटा में है। वहां संपर्क किया, लेकिन जैसे ही पुलिस ने मोबाइल लोकेशन खंगाली तो पता चला कि उसकी आखिरी लोकेशन इंदौर के भोलाराम उस्ताद मार्ग की है।

जब कोटा पुलिस ने यह खुलासा कर दिया कि लड़की कोटा नहीं आई, इंदौर में है। पकड़े जाने के डर से काव्या और हर्षित ने इंदौर का अपना पुराना कमरा खाली कर दिया। दोनों छिपने के लिए अमृतसर चले गए। कुछ दिन वहां रहे। पैसा खत्म हो गया तो गुरुद्वारे के क्षेत्र में रहे।

इंदौर वापस आए और 29 मार्च को नया रूम ढूंढने निकले

अमृतसर से इंदौर आकर काव्या और हर्षित देवगुराड़िया क्षेत्र में किराए से रूम ढूंढने निकले। दोनों सनावदिया रोड स्थित शिवाजीराम वाटिका कॉलोनी पहुंचे। दोनों पैदल इधर से उधर भटक रहे थे। दोस्त हर्षित को चक्कर आने लगा। दोनों कॉलोनी में पेड़ के नीचे छांव में बैठ गए थे। कॉलोनी में एक किराना दुकान है। दुकानदार पूरा नजारा देख रहा था। इसके बाद दोनों कॉलोनी की गलियों में चले गए।

यहां सुरेंद्र चौहान के मकान पर ‘रूम किराए से देना है’ का बोर्ड लगा था। उस दिन सुरेंद्र भी वहीं थे जो कि मूलत: मूसाखेड़ी में रहते हैं। दोनों ने सुरेंद्र से किराए पर रूम लेने के लिए बातचीत की। सुरेंद्र ने दूसरी मंजिल का रूम दे दिया। आधार कार्ड मांगा तो दोनों ने एक-दो दिन में देने की बात कहकर टाल दिया। रूम मिलने पर हर्षित गद्दा और अन्य सामान खरीद कर लाया, तभी कॉलोनी के लोगों ने देखा था।

किराना दुकान से चिप्स-कुरकुरे खरीदे

किराना दुकानदार आशीष चौहान ने बताया दोनों को चार-पांच दिन पहले देखा था। लड़के को चक्कर आ रहा था तो वो सड़क पर पेड़ के नीचे बैठा था। मुझे लगा किसी के यहां आया होगा। इसके बाद मैंने सामने वाले मकान में उन्हें देखा। रेंट पर उन्होंने रूम ले लिया था। मेरी दुकान पर दोनों सामान भी खरीदने आते थे। शाम के टाइम मार्केट में थोड़ा-बहुत घूमते थे। साथ में जाते और साथ में ही आते थे। लड़की दुकान पर चिप्स, कुरकुरे लेने आई थी। खाने के दूसरे आइटम भी ले गई थी। सफेद कलर का चश्मा लगाया हुआ था।

रोज जब दोनों जाते थे तो लड़की स्कॉर्फ बांधे रहती। वह सामान्य ही दिख रही थी। किसी प्रकार की कोई घबराहट नहीं थी। लड़का भी 2 अप्रैल की शाम को साढ़े 4 बजे सामान लेने आया था। चिप्स और राजश्री लेकर गया था। पुलिस आई तो मैं दुकान पर नहीं था। पापा दुकान पर बैठे थे। रात को दोनों को कमरे से बाहर निकलते नहीं देखा। किसी को उनसे मिलने आते हुए भी नहीं देखा। मंगलवार शाम को करीब करीब 6.30 बजे पुलिस दोनों को साथ ले गई।

ज्यादातर समय दोनों रूम में ही रहते थे

जिस मकान में रूम रेंट पर लिया था वहां अन्य किराएदार भी रहते हैं। मकान मालिक ने किसी कंपनी के कर्मचारियों को कमरे किराए पर दिए हैं। कर्मचारियों के कंपनी ने कुक रखा है, जो सभी का खाना बनाता है। कुक ने उन्हें आते-जाते देखा था।

कुक शिवदास ने बताया कि 29 मार्च को दोनों को मकान मालिक ने कमरा किराए पर दिया। कितने में दिया ये मकान मालिक ही बता सकते हैं। दोनों को आते-जाते देखा था, लेकिन उनसे कोई बातचीत नहीं हुई। ज्यादातर समय दोनों रूम में ही रहते थे। शाम को बाहर निकलते देखा था। रूम में खाना बनाते थे या नहीं ये तो नहीं पता।

2 अप्रैल शाम को मैं अपना काम कर रहा था, तब पुलिसवाले दोनों को पकड़कर ले गए। लोगों से पता चला कि पूरा मामला क्या था। पहले से कोई जानकारी नहीं थी कि लड़की छिपकर लड़के के साथ रह रही है।

मकान मालिक सुरेंद्र चौहान को सूचना दी गई। पुलिस ने फोन किया होगा। मकान मालिक यहां नहीं रहते हैं। देख-रेख के हिसाब से आते-जाते हैं। जिस दिन रेंट पर रूम लिया था, उस दिन मकान मालिक आए हुए थे। बाहर रूम रेंट का बोर्ड लगा था। दोनों ने मकान मालिक से ही बात की थी। रेंट पर रूम लेने के बाद दोनों से मिलने कोई नहीं आया।

खुड़ैल पुलिस बुधवार सुबह पहुंची

क्राइम ब्रांच ने मंगलवार शाम को काव्या और हर्षित को पकड़ा। खुड़ैल पुलिस को जब पता चला कि उनके थाना क्षेत्र में ही लड़की किराए से कमरा लेकर रह रही थी तो पुलिस हरकत में आई। बुधवार सुबह 2 पुलिसकर्मी शिवजीराम वाटिका कॉलोनी पहुंचे, जहां रूम पर ताला लगा था। मकान मालिक सुरेंद्र चौहान का पूछा तो पता चला वो मूसाखेड़ी में रहता है, हालांकि बुधवार दोपहर तक पुलिस का उससे संपर्क नहीं हो पाया था। रूम रेंट पर देने से पहले एग्रीमेंट किया या नहीं। किराएदार की सूचना पुलिस को मकान मालिक ने दी थी या नहीं इन सवालों के जवाब पुलिस के पास भी नहीं थे। मामले में अधिकारियों ने उससे पूछताछ करने की बात कही थी।

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