सांसद जीत की गारंटी नहीं, MP वाला दांव पहले भी चल चुकी है BJP; देखें कैसा रहा नतीजा

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट में अपने दिग्गजों को मैदान में उतार है। 39 विधानसभा सीटों के लिए घोषित उम्मीदवारों की लिस्ट में दूसरी सूची में 3 केंद्रीय मंत्रियों समेत 7 सांसदों को टिकट देकर चौंका दिया है। इसमें मुरैना की दिमनी सीट से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सतना से सांसद गणेश सिंह, सीधी से सांसद रीती पाठक, जबलपुर पश्चिम से सांसद राकेश सिंह, गडरवारा से सांसद उदय प्रताप सिंह, नरसिंहपुर से केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल और निवास सीट से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को विधानसभा टिकट दिया गया है।

हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले भी बीजेपी विधानसभा चुनाव में इस फॉर्मूले को आजमा चुकी है। साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने पांच मौजूदा लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को मैदान में उतारा था। लेकिन केवल दो बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार और निसिथ प्रमाणिक अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जीतने में कामयाब रहे। अन्य सांसद स्वपन दासगुप्ता, लॉकेट चटर्जी और   बाबुल सुप्रियो को हार का सामना करना पड़ा। वहीं, केरल में अभिनेता से नेता बने और तत्कालीन राज्यसभा सांसद, सुरेश गोपी, जिन्होंने त्रिशूर से चुनाव लड़ा था। वह अंतिम वोटों की गिनती में तीसरे स्थान पर आए। इसी तरह, तत्कालीन राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने कांजीरापल्ली सीट पर चुनाव हार गए।

इसी तरह साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने करहल की हाई-प्रोफाइल सीट पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव  खिलाफ केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल को खड़ा किया। अखिलेश यादव ने बड़े अंतर से बघेल को हराया। बीजेपी ने निर्वाचित सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री होने के बावजूद प्रतिमा भौमिक को त्रिपुरा से राज्य चुनाव लड़ने की अनुमति दी। उन्होंने धनपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

हाल के सालों में यह पहली बार है कि बीजेपी ने किसी विधानसभा चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में मौजूदा सांसदों को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इनमें से प्रत्येक सांसद मध्य प्रदेश के विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह कदम सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के पार्टी के इरादे का संकेत देता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां चुनाव लड़ रही हैं। बीजेपी के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज सिंह चौहान को सत्ता विरोधी लहर के बारे में बीजेपी की चिंताओं के बीच अब तक उम्मीदवार के रूप में नामित नहीं किया गया है।

वहीं, इस बार बीजेपी ने जिन सांसदों को टिकट दिया है वे सभी मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रीय इलाकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हें मैदान में उतारकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि इस बार पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने जा रही है। इसीलिए वह हर क्षेत्र से एक बड़ा चेहरा विधानसभा चुनाव में उतार रही है। हालंकि इसका कितना फ़ायदा बीजेपी को मिलेगा इसके लिए चुनावी नतीजों तक इंतजार करना ही होगा।

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