इस बार फीकी पड़ सकती है इमामों की ईद:दिसंबर के बाद से नहीं आई सैलरी; कमेटी ने कहा- जल्द आ जाएगी

इमामों और मुअज्जिनों की ईद एक बार फिर फीकी हो सकती है। आखिरी बार इनकी सैलरी दिसंबर माह में आई थी। इसके बाद से वेतन नहीं मिला है। जिन्हें वेतन नहीं मिला उनमें भोपाल के अलावा मसाजिद कमेटी से संबंधित रायसेन, सीहोर और बैरसिया की मस्जिदें शामिल हैं। कमेटी के अधिकारियों की माने तो सरकारी अनुदान नहीं मिलने के चलते यह स्थिति बनी है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इमामों और मुअज्जिनों की सैलरी आएगी।

इसलिए नहीं आई है सैलरी

मसाजिद कमेटी के अधिकारियों की माने तो सरकार से मिलने वाले अनुदान के चलते ऐसा हुआ है। ऐसा हर साल होता है कि फरवरी-मार्च में इमामों की सैलरी आने में दिक्कत होती है। या दो से तीन महीने तक सैलरी अनुदान की आखरी किस्त आने तक रुक जाती है। बता दें कि मसाजिद कमेटी को साल में चार किस्तों में अनुदान दिया जाता है।

कर्जा लेकर चुकानी पड़ रही बच्चों की फीस

पुराने शहर की मस्जिद के एक इमाम ने बताया कि उनकी सैलरी पांच हजार रुपए है, दिसंबर में आखरी बार आई थी, उन्होंने कहा कि इसके चलते मुझे बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, एक तरफ मकान मालिक को हर महीने 3 हजार रुपए किराया देना होता है तो दूसरी तरफ मेरी बेटी की स्कूल की फीस भी कर्जा लेकर देनी पड़ रही है। हमने कई बार कमेटी से संपर्क करने की कोशिश की है।

हर साल बनती है स्थिति
शहर की मस्जिद के एक अन्य मुअज्जिन का कहना है कि वे सैलरी का इंतजार कर रहे हैं। घर में कई तरह के खर्चे होते हैं। कई बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना काम चला रहे हैं, और घर का किराया दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर साल फरवरी से अप्रैल के बीच ऐसी स्थिति बनती है, जब हमारी सैलरी दो से तीन महीने के लिए अटक जाती है।

3 से 4 दिन में आ सकती है सैलरी: मसाजिद कमेटी
मसाजिद कमेटी अध्यक्ष उवैस अली ने बताया कि अनुदान राशि के देरी से आने की वजह से ऐसी स्थिति बनी है, हमसे कुछ कागजात मांगे गए हैं, जो कि हमने दे दिए हैं, उम्मीद यही है कि तीन से चार दिन में इमामों की सैलरी आ आएगी।

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