कौन थे अयोध्या के पुरोहित देवीदीन पांडेय, जिनकी तलवार ने उतारे थे बाबर की सेना के 700 सिर

अयोध्या में कल यानी 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर में रामलला विराजमान होने वाले हैं। वर्षों की तपस्या के बाद उन्हें अपना स्थान मिलने जा रहा है। मुगल जब भारत आए तो उन्होंने अयोध्या पर भी आक्रमण किया था। कहा जाता है कि इसी दौरान उसने राम जन्मस्थली को भी नष्ट कर दिया और वहां एक मस्जिद का निर्माण कराया, जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है।

बाबार की सेना के खिलाफ युद्ध से जुड़े इतिहास में अयोध्या के पुरोहित देवीदीन पांडेय का भी जिक्र होता है। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपनी तलवार से बाबर की सेना के करीब 700 सैनिकों के सिर कलम कर दिए थे।

‘In Near Ruins’ नामक किताब में पेज नंबर 26 पर अयोध्या के सनेथू गांव के एक कर्मकांडी ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वावे देवी दीन पांडेय की वीरता का जिक्र है। किताबक के मुताबिक, देवीदीन पांडेय ने महज 3 घंटे में बाबर के 700 सैनिकों को अपनी तलवार से मौत के घाट उतार दिया था। आपको यह भी बता दें कि उनका परिवार सूर्यवंशी क्षत्रियों का पुरोहित था। वे मलखंभ, कुश्ती के अलावा शास्त्र के साथ ही शस्त्र चलाने के भी शौकीन थे।  बाबर ने खुद उनकी वीरता की पुष्टि अपनी जीवनी में की थी।

कहा जाता है कि युद्ध के दौरान देवीदीन मुगल सैनिकों से घिर गए। सैनिकों ने इनपर लखौरी ईंटों की बरसात कर दी। देवीदीन के सिर में भी काफी चोट लग गई। हालांकि, उन्होंने हर नहीं मानी और अपने सिर को पगड़ी से कसकर बांध लिया। इसके बाद उन्होंने बाबर के सेनापति मीर बांकी को पकड़ लिया और अपने भाले से प्रहार कर दिया। लेकिन वह अपनी जान बचाने में सफल रहा।

देवीदीन के प्रहार से वहां मौजूद एक हाथी का महावत मारा गया। हाथी के हौंदे में छिपे मीर बांकी ने बंदूक भरकर देवीदीन पर फायर कर दिया। जिससे देवीदीन की मौके पर ही मौत हो गई। बाबर ने अपनी जीवनी में स्वयं इसके बारे में लिखा है। बाबार ने ही कहा है कि अकेले देवीदीन ने सात सौ मुगल सैनिकों को मार डाला। 9 जून 1528 को दोपहर करीब दो बजे उनकी मृत्यू हो गई थी।

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