40 साल फर्जी सर्टिफिकेट से कर ली नौकरी:रिटायरमेंट से 2 साल पहले हुई 10 साल की सजा; इंदौर के ‘नटवरलाल’ पुलिसवाले की कहानी

पुलिस डिपार्टमेंट में नौकरी के लिए उसने कागजों में अपनी जाति ही बदल डाली। ब्राह्मण से कोरी बन गया। तब किसी को भनक तक नहीं लगी और 19 साल की उम्र में वो पुलिस में भर्ती हो गया। इसके 23 साल बाद एक शिकायत हुई जिसने उसकी नींद उड़ा दी, क्योंकि शिकायत उसके जाति प्रमाण पत्र को लेकर थी। फिर भी कुछ नहीं हुआ।

कोर्ट में केस और नौकरी दोनों चलती रही। रिटायरमेंट में भी दो साल ही बचे थे यानी जिंदगी भर फर्जी प्रमाण पत्र से उसने पूरी नौकरी कर ली। मामले में अब उसे दोषी पाते हुए 10 साल की सजा हुई है। पढ़िए कौन है वो नटवरलाल जो पकड़ाने के बाद भी गुमराह करता रहा। शिकायत से फैसले तक केस की पूरी कहानी…।

मामले में 3 दिन पहले ही कोर्ट का फैसला आया है। जिला लोक अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्‍तव ने बताया कि मामले में माननीय न्‍यायालय चतुर्थ अपर सत्र न्‍यायाधीश जयदीप सिंह ने धारा 467, सहपठित धारा 471, भादंवि में 10 साल की सजा और धारा 420 व 468 में 7-7 साल की सजा सहित कुल 4 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।

पहले आरोपी कौन है और पूरा मामला क्या है ये जान लीजिए

आरोपी का नाम सत्यनारायण पिता राम वैष्णव उम्र 60 साल निवासी लक्ष्मीपुरी कॉलोनी इंदौर है। उसका जन्म 7 जून 1964 को हुआ। 19 साल की उम्र में 4 अगस्त 1983 को सत्यनारायण पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हो गया। भर्ती के 23 साल बाद 6 मई 2006 को छोटी ग्वालटोली के थाना प्रभारी को पुलिस अधीक्षक ऑफिस से आरक्षक सत्यनारायण बैज नं.1273 के बारे में फर्जी जाति प्रमाण पत्र देकर पुलिस में नौकरी करने से संबंधित शिकायत मिली।

शिकायत के साथ एक जांच प्रतिवेदन भी था। इसमें शिकायत करने वाली वर्षा साधु, ऋषि कुमार अग्निहोत्री और ईश्वर वैष्णव के बयान थे। बयान में कहा गया कि आरोपी सत्यनारायण वैष्णव ने कोरी समाज का जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नौकरी प्राप्त की है। आरोपी के पिता रामचरण वैष्णव, उसका बडा भाई श्यामलाल वैष्णव और छोटा भाई ईश्वर वैष्णव सभी वैष्णव ब्राह्मण हैं। इसके बावजूद सत्यनारायण ने कोरी जाति का सर्टिफिकेट लगाया और नौकरी हासिल कर ली।

मामले में आरोपी सत्यनारायण किस जाति का है, ये पता लगाने के लिए उसके स्कूल में पुलिस ने छानबीन की। शासकीय हिन्दी प्राथमिक विद्यालय क्रमांक 33 किला मैदान में अध्यापक अमृतलाल कोठारी ने कोर्ट को बताया कि ‘स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर उसने पुलिस को आरोपी की जाति के संबंध में प्रमाण-पत्र दिया था।’ स्कूल के जाति प्रमाण पत्र में सत्यनारायण की जाति हिन्दू ब्राह्मण लिखी है। आरोपी की जाति तो स्कॉलर रजिस्टर में लिखी थी, लेकिन जन्म तारीख नहीं लिखी थी, जिसे बाद में लिखा गया। मामले में आरोपी की जन्म तारीख से जुड़ा कोई विवाद नहीं होने के चलते इसकी जांच नहीं हुई।

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